सागर। शराब में मौत का केमिकल मिलाया गया या जहरीली शराब ने 29 जिंदगियां निगल लीं, इसका जवाब अभी जहरीले सैंपल की रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगा। लेकिन बंडा क्षेत्र में मौतों के बाद सागर पुलिस जिस रफ्तार से अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई कर रही है, उसने कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
बताया जा रहा है कि सोमवार को 10 और लोगों की मौत हुई। घटना के बाद बंडा एसडीओपी को मुख्यालय भेज दिया गया। वहीं पुलिस ने महज 24 घंटे में अवैध शराब के 66 मामले दर्ज करने का दावा किया है।
अब सवाल यह है कि जिन गांवों और इलाकों में अवैध शराब का कारोबार चल रहा था, वहां पुलिस को पहले इन ठिकानों की भनक क्यों नहीं लगी? 29 मौतों के बाद अचानक ऐसा क्या हुआ कि पुलिस को अवैध शराब के ठिकाने एक-एक कर दिखाई देने लगे?
हालात देखकर तो ऐसा लग रहा है कि पुलिस की कार्रवाई से पहले ही अवैध शराब तस्करों के ठिकानों की लोकेशन शायद किसी ने गूगल मैप पर सेव कर रखी थी। कल तक जिन ठिकानों तक पहुंचने में मुश्किल थी, अब वहां पुलिस की गाड़ियां धड़ाधड़ पहुंच रही हैं और कार्रवाई पर कार्रवाई सामने आ रही है।
यह तेजी निश्चित रूप से स्वागत योग्य है, लेकिन सवाल यह भी है कि अगर यही सक्रियता पहले दिखाई जाती तो क्या इतनी बड़ी त्रासदी को टाला जा सकता था?
24 घंटे में 66 प्रकरण दर्ज होना पुलिस की सक्रियता दिखाता है, लेकिन यह आंकड़ा उस व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा करता है, जिसके तहत इतने बड़े पैमाने पर अवैध शराब का कारोबार चलता रहा और कार्रवाई तब तेज हुई, जब कई परिवारों के घरों के चिराग बुझ चुके थे।
अब असली परीक्षा सिर्फ अवैध शराब पकड़ने की नहीं, बल्कि यह पता लगाने की है कि जहरीली शराब लोगों तक पहुंची कैसे, इसके पीछे कौन लोग हैं और स्थानीय स्तर पर किसकी जिम्मेदारी तय होती है।
सैंपल की रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट बताएगी कि मौत का केमिकल क्या था, लेकिन जनता यह जरूर जानना चाहती है कि इस पूरे मामले में लापरवाही का केमिकल आखिर किस व्यवस्था में घुला हुआ था।








