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सागर के छठवीं के छात्र का कमाल, AI से बनाया ‘Impact OS’, बेंगलुरु में मिला यंग इनोवेटर सम्मान

By: गजेंद्र ठाकुर•
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सागर के छठवीं के छात्र का कमाल, AI से बनाया ‘Impact OS’, बेंगलुरु में मिला यंग इनोवेटर सम्मान

सागर के छठवीं के छात्र का कमाल, AI से बनाया ‘Impact OS’, बेंगलुरु में मिला यंग इनोवेटर सम्मान

दूषित पानी से लेकर जहरीली हवा और जर्जर इमारतों तक की जानकारी एक मंच पर लाने की पहल

सागर। उम्र छोटी, लेकिन सोच बड़ी! सागर के आर्मी पब्लिक स्कूल में कक्षा छठवीं के छात्र अर्जुन उपाध्याय ने तकनीक की दुनिया में ऐसा कदम उठाया है, जिसने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। अर्जुन ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मदद से ‘Impact OS’ नामक वेब पोर्टल और ऐप विकसित किया है। इस नवाचार के लिए उन्हें बेंगलुरु में आयोजित हैक फेस्ट में ‘यंग इनोवेटर’ सम्मान से नवाजा गया।

दूषित पानी और जर्जर इमारतों की घटनाओं ने झकझोरा, फिर तैयार किया डिजिटल समाधान

इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों और दिल्ली में जर्जर इमारतों से जुड़ी घटनाओं ने अर्जुन को सोचने पर मजबूर किया कि आखिर आम लोगों को अपने आसपास के खतरों की जानकारी एक ही जगह क्यों नहीं मिल सकती? इसी सवाल से ‘Impact OS’ की परिकल्पना ने जन्म लिया। अर्जुन ने इस विचार को तकनीक का रूप देने के लिए काम शुरू किया और करीब आठ महीने की मेहनत के बाद इस प्लेटफॉर्म को विकसित किया।

एक क्लिक पर पानी, हवा और मौसम की जानकारी, जर्जर भवनों के अलर्ट की भी परिकल्पना

‘Impact OS’ का उद्देश्य पानी की गुणवत्ता, वायु प्रदूषण, मौसम और शहरी सुविधाओं से जुड़ी जानकारी को एक ही डिजिटल डैशबोर्ड पर उपलब्ध कराना है। इसके लिए नगर निगमों, स्थानीय प्रशासन, जल परीक्षण प्रयोगशालाओं तथा सार्वजनिक मौसम और वायु गुणवत्ता पोर्टलों पर उपलब्ध सूचनाओं को एकीकृत करने का प्रयास किया गया है।

परियोजना की परिकल्पना में नगर निकायों की जल आपूर्ति, बिजली एवं सौर ऊर्जा के उपयोग, ऊर्जा संसाधनों और पौधरोपण से जुड़े आंकड़ों को भी शामिल करने की योजना है। जर्जर भवनों के संबंध में नगर निकायों द्वारा जारी नोटिस और उनसे जुड़े अलर्ट उपलब्ध कराने की सुविधा भी प्रस्तावित है। हालांकि, इन सुविधाओं की उपलब्धता संबंधित आंकड़ों और सरकारी स्रोतों से मिलने वाली जानकारी पर निर्भर करेगी।

पिता के पुराने लैपटॉप से शुरू हुआ सफर, YouTube से सीखी कोडिंग

अर्जुन की तकनीकी दुनिया में दिलचस्पी महज आठ वर्ष की उम्र में शुरू हुई। उनके पिता ने उन्हें अपना पुराना लैपटॉप दिया था। उसमें सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर से जुड़ी समस्याओं को ठीक करने की कोशिश करते-करते अर्जुन की कंप्यूटर में रुचि बढ़ती गई। इसके बाद उन्होंने YouTube वीडियो की मदद से प्रोग्रामिंग और कोडिंग सीखना शुरू किया।

स्कूल की एक प्रतियोगिता के लिए ऐप बनाने के दौरान मिले प्रोत्साहन ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। शिक्षकों के मार्गदर्शन और लगातार प्रयासों से उन्होंने ‘Impact OS’ तैयार किया। इस काम में उनके सहपाठी अर्णव निरंजन भी सहयोग कर रहे हैं।

अर्जुन के पिता डॉ. चंद्रमा प्रकाश उपाध्याय डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के जैव प्रौद्योगिकी विभाग में प्रोफेसर हैं, जबकि उनकी माता डॉ. देवांशी उपाध्याय DST वुमन साइंटिस्ट हैं।

अब Google Play Store पर ऐप लाने की तैयारी

बेंगलुरु में सम्मान मिलने के बाद अर्जुन अब अपने ऐप को Google Play Store पर उपलब्ध कराने की तैयारी में जुटे हैं। परियोजना को और अधिक उन्नत एवं उपयोगी बनाने के लिए काम जारी है। अर्जुन ने अपनी उपलब्धि का श्रेय विद्यालय के प्राचार्य और शिक्षकों के सहयोग, प्रोत्साहन तथा मार्गदर्शन को दिया है।

कक्षा छठवीं में पढ़ने वाले अर्जुन की यह पहल बताती है कि नवाचार के लिए उम्र नहीं, बल्कि जिज्ञासा, सीखने की लगन और समाज की समस्याओं को समझने वाली सोच मायने रखती है। अब देखना होगा कि ‘Impact OS’ अपने अगले चरण में आम नागरिकों के लिए कितना उपयोगी साबित होता है।

गजेंद्र ठाकुर

By: गजेंद्र ठाकुर

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