कम वर्षा और बारिश में अंतराल से बढ़ी किसानों की चिंता, कृषि विज्ञान केंद्र ने जारी की वैज्ञानिक सलाह

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कम वर्षा और बारिश में अंतराल से बढ़ी किसानों की चिंता, कृषि विज्ञान केंद्र ने जारी की वैज्ञानिक सलाह

सागर। जिले में पिछले 10–12 दिनों से पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण खरीफ फसलों में नमी की कमी की स्थिति बनने लगी है। इसे देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र, सागर एवं कृषि विभाग ने किसानों के लिए आकस्मिक कृषि सलाह जारी की है। संयुक्त मैदानी भ्रमण के दौरान पाया गया कि जिले के अधिकांश विकासखंडों में सोयाबीन, उड़द, मूंग, अरहर, तिल एवं मक्का की बुवाई पूरी हो चुकी है तथा अधिकांश क्षेत्रों में अंकुरण हो चुका है, लेकिन वर्षा में अंतराल के कारण नवांकुरित फसलें प्रभावित हो रही हैं।

कृषि विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, वे स्प्रिंकलर अथवा हल्की सिंचाई के माध्यम से फसलों को जीवन रक्षक सिंचाई दें। साथ ही खेतों में जलभराव नहीं होने दें।

विशेषज्ञों के अनुसार 15 से 20 दिन की फसल में हल्की निराई-गुड़ाई करने से खरपतवार नियंत्रण के साथ मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहती है। खरपतवारनाशी का उपयोग केवल पर्याप्त नमी की स्थिति में और अनुशंसित मात्रा एवं समय के अनुसार ही किया जाए।

सलाह में कहा गया है कि जिन खेतों में अंकुरण नहीं हुआ है या पौधे नष्ट हो गए हैं, वहां दोबारा सोयाबीन और मक्का की बुवाई न करें। इसके स्थान पर उड़द, तिल अथवा रमतिल (नाइजर) जैसी कम अवधि और अपेक्षाकृत सूखा सहन करने वाली फसलों को अपनाया जा सकता है।

किसानों को अतिरिक्त आय के लिए भिंडी, बरबटी, टमाटर, बैंगन, मिर्च तथा कद्दूवर्गीय सब्जियों की खेती करने की भी सलाह दी गई है। वहीं जिन खेतों में अभी बुवाई नहीं हो सकी है और सिंचाई की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां सनै, ढैंचा अथवा चारा लोबिया की बुवाई कर हरी खाद तैयार करने की सलाह दी गई है, जिससे भूमि की उर्वराशक्ति और जैविक कार्बन में वृद्धि होगी।

कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को निराई-गुड़ाई के बाद खेतों में सूखी घास, भूसा अथवा फसल अवशेषों से मल्चिंग करने की सलाह भी दी है, जिससे नमी का संरक्षण होगा और खरपतवार पर नियंत्रण रहेगा।

फलदार पौधों की तैयारी को लेकर भी किसानों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। गड्ढों में उपजाऊ मिट्टी के साथ अच्छी तरह सड़ी गोबर की खाद, नीमखली एवं सिंगल सुपर फॉस्फेट मिलाकर भरने तथा पर्याप्त वर्षा या नमी होने पर ही पौधरोपण करने की सलाह दी गई है। पहले से लगाए गए पौधों के चारों ओर मल्चिंग करने और उन्हें सहारा देने के लिए मजबूत स्टेक लगाने की भी अपील की गई है।

कृषि विज्ञान केंद्र, सागर ने किसानों से अपील की है कि वर्तमान मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए वैज्ञानिक अनुशंसाओं का पालन करें तथा किसी भी तकनीकी समस्या की स्थिति में कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग के विशेषज्ञों से संपर्क कर आवश्यक सलाह प्राप्त करें।

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