MP : चावल घोटाले की जांच तेज, 150 से ज्यादा लोग एसआईटी के रडार पर

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MP : चावल घोटाले की जांच तेज, 150 से ज्यादा लोग एसआईटी के रडार पर

भोपाल। एथेनॉल निर्माण के लिए आवंटित चावल में हुए कथित घोटाले की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। मामले की तह तक पहुंचने के लिए पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) राइस मिलों से ऐसे तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्य जुटा रही है, जिनसे पूरे फर्जीवाड़े की परतें खुल सकती हैं। जांच के तहत मिलों की बिजली खपत, मजदूरों की संख्या और उनकी वास्तविक उपस्थिति की भी पड़ताल की जाएगी। वहीं, जब्त किए गए सीसीटीवी फुटेज का भी परीक्षण जारी है।

जांच एजेंसी के रडार पर फिलहाल राइस मिल संचालकों, ट्रक ऑपरेटरों और प्लांट के अधिकारी-कर्मचारियों सहित 150 से अधिक लोग हैं। इनमें से करीब आधे लोगों से पूछताछ की जा चुकी है। पुलिस को उम्मीद है कि ट्रक मालिकों और ड्राइवरों से मिली जानकारी तथा सीसीटीवी फुटेज के आधार पर चावल की वास्तविक आवाजाही का पता लगाया जा सकेगा। इससे पहले बालाघाट में सामने आए चावल घोटाले में भी ट्रक ऑपरेटरों की मिलीभगत उजागर हो चुकी है।

सूत्रों के अनुसार यह फर्जीवाड़ा पिछले आठ माह से एक वर्ष के दौरान हुआ है। वर्ष 2021 में लागू हुई मध्य प्रदेश की एथेनॉल नीति और वर्ष 2025 व मई 2026 में किए गए संशोधनों के बाद अब पुराने मामलों की भी जांच की जा रही है। बालाघाट कलेक्टर मृणाल मीना ने मामले की जांच के लिए एफसीआई के क्षेत्रीय प्रबंधक को पत्र भेजा है, जबकि एसआईटी अन्य एथेनॉल प्लांटों को भी जांच के दायरे में लाने की तैयारी कर रही है।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पूरे घोटाले की जड़ एथेनॉल निर्माण के लिए सब्सिडी दर पर मिलने वाला चावल है। एथेनॉल प्लांटों को यह चावल 2,320 रुपये प्रति क्विंटल की दर से मिलता है, जबकि धान की खरीद, मिलिंग, परिवहन और भंडारण सहित इसकी वास्तविक लागत करीब 4,000 रुपये प्रति क्विंटल बैठती है। इसी मूल्य अंतर का कथित रूप से गलत फायदा उठाकर बड़े पैमाने पर अनियमितता किए जाने की आशंका जताई जा रही है।

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