डॉक्टर्स डे पर आयुष्मान आरोग्य मंदिर कपूरिया में आईएमए एवं आईएसए द्वारा टीबी जागरूकता एवं सीपीआर का मेगा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

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डॉक्टर्स डे पर आयुष्मान आरोग्य मंदिर कपूरिया में आईएमए एवं आईएसए द्वारा टीबी जागरूकता एवं सीपीआर का मेगा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

सागर। राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए), सागर एवं इंडियन सोसायटी ऑफ एनेस्थीसियोलॉजिस्ट्स (आईएसए), सागर के संयुक्त तत्वावधान में आयुष्मान आरोग्य मंदिर, कपूरिया में एक दिवसीय विशेष टीबी जांच एवं जागरूकता शिविर तथा कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) मेगा प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य आमजन को आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी देना, टीबी की शीघ्र पहचान एवं रोकथाम के प्रति जागरूक करना तथा आपातकालीन परिस्थितियों में जीवनरक्षक सीपीआर तकनीक का व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना था।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आईएमए सागर के अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद ने बताया कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर (पूर्व में आयुष्मान भारत–स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र) भारत सरकार की प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने बताया कि सागर जिले में वर्तमान में 247 आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित हैं, जहां मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ मधुमेह, उच्च रक्तचाप जैसी गैर-संचारी बीमारियों की जांच, निःशुल्क दवा वितरण तथा टेली-परामर्श जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

टीबी जागरूकता सत्र में डॉ. साद ने बताया कि क्षय रोग मुख्यतः संक्रमित व्यक्ति के खांसने अथवा छींकने से फैलता है। उन्होंने कहा कि जिन व्यक्तियों में रोग के लक्षण नहीं होते, उनमें लेटेंट टीबी संक्रमण की पहचान के लिए सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में Cy-TB जांच निःशुल्क उपलब्ध है। समय पर जांच एवं निवारक उपचार से भविष्य में सक्रिय टीबी विकसित होने की संभावना लगभग 80 प्रतिशत तक कम की जा सकती है।

शिविर के दौरान 47 नागरिकों की स्वास्थ्य जांच की गई, जिसमें रक्त परीक्षण, खांसी (ख़ख़ार) की जांच तथा पोर्टेबल डिजिटल एक्स-रे जैसी आधुनिक सुविधाओं का उपयोग किया गया। जांच के दौरान 3 व्यक्तियों में टीबी के संभावित लक्षण पाए गए, जबकि 2 नए मधुमेह रोगियों की भी पहचान की गई, जिन्हें आवश्यक परामर्श एवं उपचार हेतु चिन्हित किया गया।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण मैनिकिन आधारित सीपीआर मेगा प्रशिक्षण रहा। मुख्य प्रशिक्षक डॉ. अजय सिंह ने प्रतिभागियों को हृदय गति रुकने जैसी आपातकालीन परिस्थितियों में सही समय पर एवं वैज्ञानिक विधि से सीपीआर देने का व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया। उन्होंने कहा कि समय पर दिया गया सीपीआर मस्तिष्क एवं अन्य महत्वपूर्ण अंगों तक रक्त प्रवाह बनाए रखने में सहायक होता है तथा अनेक परिस्थितियों में किसी व्यक्ति का जीवन बचाने में निर्णायक भूमिका निभाता है।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में जिला क्षय अधिकारी डॉ. आरिफ कुरैशी, डॉ. अभय, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी रविकांत अहीरवार, एएनएम रजनी, पिरामल स्वास्थ्य से आयुषी शुक्ला तथा स्थानीय नागरिकों का उल्लेखनीय सहयोग एवं सहभागिता रही।

आईएमए एवं आईएसए सागर ने बताया कि यह कार्यक्रम उनकी सतत जनस्वास्थ्य जागरूकता मुहिम का हिस्सा है। भविष्य में भी सार्वजनिक स्थलों, शैक्षणिक संस्थानों एवं कार्यालयों में टीबी जागरूकता एवं सीपीआर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक नागरिक जीवनरक्षक तकनीकों से प्रशिक्षित हों और टीबी मुक्त भारत के राष्ट्रीय अभियान को जनभागीदारी के माध्यम से सशक्त बनाया जा सके।

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