सागर नगर निगम में नामांतरण प्रकरणों का अंबार, फाइलें जानबूझकर लटकाने के आरोप
सागर। सागर नगर निगम में प्रॉपर्टी नामांतरण के लंबित प्रकरणों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप हैं कि निगम की राजस्व शाखा में नामांतरण की प्रक्रिया को जानबूझकर धीमा किया जा रहा है, जिससे आम नागरिक महीनों तक परेशान हो रहे हैं। कई मामलों में पीड़ितों को बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जबकि कुछ लोग कथित रूप से “सेटिंग” के जरिए काम जल्दी कराने का दावा करते नजर आते हैं।
सूत्रों के अनुसार निगम के कुछ कर्मचारियों और बाहरी लोगों की एक टीम इस पूरे तंत्र में सक्रिय बताई जा रही है। आरोप है कि नामांतरण के मामलों को इतना उलझाया जाता है कि आवेदक अंततः परेशान होकर ले-देकर मामला निपटाने की ओर मजबूर हो जाता है।
बताया जा रहा है कि जिन मामलों में आवेदक मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 पर शिकायत दर्ज कराते हैं, वहां भी समाधान की बजाय प्रकरण लंबे समय तक L1 और L2 स्तर पर उलझे रहते हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जवाब और कार्रवाई के नाम पर केवल प्रक्रिया घुमाई जाती है, जबकि वास्तविक निराकरण नहीं हो पाता।
नामांतरण प्रक्रिया की सुस्ती और कथित भ्रष्ट तंत्र को लेकर शहर की बिल्डर्स लॉबी और इंजीनियर फोरम भी नाराज बताए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक इस मुद्दे पर पूर्व में विरोध और आंदोलन की रणनीति भी बनाई जा चुकी है।
कुछ पीड़ितों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सीधे नियम से काम कराने जाओ तो महीनों फाइल घूमती रहती है, लेकिन इशारों में दूसरा रास्ता बताया जाता है। आरोप यह भी हैं कि मालदार मामलों को विशेष रूप से चिन्हित किया जाता है और फिर संबंधित व्यक्ति की आर्थिक स्थिति तथा राजनीतिक पहुंच तक की जानकारी जुटाई जाती है। इसके बाद फाइलों को दबाने और राहत दिलाने के नाम पर कथित खेल शुरू होता है।
नगर निगम कार्यालय में बाहरी लोगों की आवाजाही को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप हैं कि कई गैर निगम कर्मचारी कार्यालय के विभिन्न कक्षों में सक्रिय दिखाई देते हैं, जिससे गोपनीयता और प्रशासनिक पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
हालांकि नगर निगम आयुक्त की छवि प्रशासनिक स्तर पर साफ-सुथरी मानी जाती है, लेकिन उनके नेतृत्व वाले कार्यालय में यदि इस प्रकार की गतिविधियां संचालित हो रही हैं तो पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच आवश्यक मानी जा रही है। शहरवासियों का कहना है कि नामांतरण जैसी मूलभूत नागरिक सुविधा को पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाना चाहिए, ताकि आम लोगों को अनावश्यक परेशानी और कथित भ्रष्टाचार का सामना न करना पड़े।
नामांतरण प्रक्रिया- किसी संपत्ति, मकान, प्लॉट या जमीन के पुराने मालिक के स्थान पर नए मालिक का नाम सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज किया जाता है। यह प्रक्रिया आमतौर पर खरीद-फरोख्त, वसीयत, दान, उत्तराधिकार या पारिवारिक बंटवारे के बाद कराई जाती है। नगर निगम या राजस्व विभाग में नामांतरण होने के बाद संबंधित संपत्ति का टैक्स, रिकॉर्ड और कानूनी अधिकार नए व्यक्ति के नाम पर अपडेट हो जाते हैं, जिससे भविष्य में विवाद की संभावना कम होती है।


