बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से जनजीवन अस्त व्यस्त, खेतों में सब्जी फसलों को नुकसान, विधुत व्यवस्था भी बदहाल
सागर। जिले में मौसम के बदले मिजाज ने अन्नदाता के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। बीते 2 दिन में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने न केवल सामान्य जनजीवन को थाम दिया है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की कमर तोड़कर रख दी है। जिले के जैसीनगर, बंडा और देवरी सहित कई इलाकों में बड़े आकार के ओले गिरने से सब्जी की फसलों को नुकसान पहुँचा है।
खेतों में सिर्फ ओले और पानी
ग्रामीण क्षेत्रों से आ रही तस्वीरें डराने वाली हैं। जैसीनगर और बंडा ब्लॉक में बेर और नींबू के आकार के ओले गिरे, जिससे गेहूँ, चना और खासकर सब्जी की फसलें नुकसान की भेंट चढ़ गई जिले में अधिकांश इलाको में गेहूं की फसलें कट रही हैं और खेतों में पड़ी हैं। किसानों का कहना है कि मिर्च, टमाटर और गोभी जैसी नगदी फसलें ओलों की मार से जमीन में धंस गई हैं।
बिजली संकट- ओलावृष्टि और तेज हवाओं के कारण कई जगहों पर बिजली के पोल गिर गए और तार टूट गए, जिससे जिले के अनेक हिस्से में घंटों से लाइट नही है।
सड़कों पर जलभराव और ओलों की सफेद चादर के कारण वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक लग गया है।
कागजों में ही सिमटी सक्रियता
विपदा की इस घड़ी में जहाँ किसानों को तत्काल राहत और सांत्वना की जरूरत है, वहीं जिला प्रशासन का रवैया उदासीन नजर आ रहा है। ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक टीमों का अभाव- अब तक सर्वे के लिए किसी भी आधिकारिक टीम का गठन नहीं किया गया है।
नदारद अमला- प्रभावित गांवों के किसानों का आरोप है कि पटवारी और कृषि विभाग का मैदानी अमला मौके से नदारद है। ओलावृष्टि के घंटों बीत जाने के बाद भी कोई सुध लेने नहीं पहुँचा।
मुआवजे की आस- फसलें बर्बाद होने के बाद अब किसानों के पास केवल सरकारी मुआवजे का सहारा है, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
फिलहाल जिले में आसमान अब भी बादलों से घिरा है। यदि जल्द ही प्रशासनिक अमला सक्रिय नहीं हुआ और नुकसान का आकलन शुरू नही हो पायेगा।


