MP हवाला मामले में बड़ा एक्शन: थाना प्रभारी समेत 4 पुलिसकर्मी निलंबित

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MP हवाला मामले में बड़ा एक्शन: थाना प्रभारी समेत 4 पुलिसकर्मी निलंबित

गुना। जिले में सामने आए चर्चित हवाला मामले में पुलिस विभाग ने सख्त कदम उठाया है। ग्वालियर रेंज के डीआईजी अमित सांघी ने धरनावदा थाना प्रभारी सहित चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई शुरुआती जांच में संदिग्ध भूमिका सामने आने के बाद की गई। साथ ही पूरे मामले की विभागीय जांच एक एसपी स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है।
जानकारी के अनुसार, 20 मार्च को गुजरात के एक आईपीएस अधिकारी के फोन कॉल के बाद पुलिसकर्मियों ने व्यापारी से लिए गए 20 लाख रुपए वापस कर दिए थे। इस घटनाक्रम के बाद मामला तेजी से बढ़ा और उच्च अधिकारियों तक पहुंच गया।
डीआईजी अमित सांघी शनिवार रात और रविवार सुबह खुद गुना पहुंचे और रूठियाई चौकी क्षेत्र में घटनास्थल का निरीक्षण कर संबंधित अधिकारियों से जानकारी ली। जांच के दौरान चार पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई, जिसके बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया।
क्या है पूरा मामला
बताया जा रहा है कि 19 मार्च को रूठियाई चौकी क्षेत्र में वाहन चेकिंग के दौरान गुजरात नंबर की एक स्कॉर्पियो (GJ 05 RK 9351) को रोका गया। यह गाड़ी एक जीरा कारोबारी की बताई जा रही है। आरोप है कि वाहन से करीब एक करोड़ रुपए नकद बरामद किए गए, लेकिन पुलिसकर्मियों ने 20 लाख रुपए अपने पास रखकर वाहन को जाने दिया।
हालांकि, अगले ही दिन गुजरात के एक आईपीएस अधिकारी का फोन आने के बाद धरनावदा पुलिस ने वह 20 लाख रुपए भी वापस कर दिए। इस घटनाक्रम ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया।
जांच में सामने आए किरदार
प्रभात कटारे (थाना प्रभारी, धरनावदा):
प्रारंभिक जांच में मुख्य भूमिका इन्हीं की बताई जा रही है। गाड़ी रुकवाने के बाद मौके पर पहुंचकर व्यापारी से बातचीत, पैसों का लेन-देन और बाद में रकम लौटाने तक की पूरी प्रक्रिया इन्होंने ही संभाली। वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना नहीं देने का आरोप भी है।
साजिद हुसैन (चौकी प्रभारी, रूठियाई):
वाहन चेकिंग के दौरान एएसआई साजिद हुसैन मौके पर मौजूद थे। इन्हीं को कार में नकदी होने की सूचना मिली थी और उनके नेतृत्व में ही वाहन रोका गया। आगे की पूरी कार्रवाई भी उनकी मौजूदगी में हुई।
देवेंद्र सिकरवार (प्रधान आरक्षक):
चेकिंग के दौरान तैनात रहे और संदिग्ध गाड़ी को रोकने में उनकी भूमिका रही। घटनाक्रम के दौरान वे मौके पर मौजूद थे।
सुंदर रमन (आरक्षक/ड्राइवर):
चौकी प्रभारी के साथ मौके पर पहुंचे और पूरी घटना के दौरान मौजूद रहे।
दूसरे दिन भी मौके पर पहुंचे डीआईजी
रविवार सुबह डीआईजी अमित सांघी एक बार फिर एसपी अंकित सोनी के साथ रूठियाई चौकी पहुंचे और मामले की बारीकी से जानकारी जुटाई। उन्होंने बताया कि संबंधित व्यापारी से संपर्क करने की कोशिश की जा रही है और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) भी निकलवाए जा रहे हैं।
डीआईजी ने साफ कहा कि यदि जांच में गड़बड़ी के पुख्ता सबूत मिलते हैं, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
अब भी अनसुलझे हैं ये सवाल
गाड़ी में वास्तव में कितनी नकदी थी? कुछ सूत्रों के अनुसार यह रकम एक करोड़ से अधिक, करीब 3-4 करोड़ तक हो सकती है।
गुजरात के किस आईपीएस अधिकारी ने फोन कर पैसे लौटाने के लिए कहा ?
उस अधिकारी ने सीधे थाना प्रभारी से ही संपर्क क्यों किया, वरिष्ठ अधिकारियों को क्यों नहीं बताया गया?
पुलिस को पहले से इस गाड़ी के बारे में सूचना किसने दी थी ?
इन सभी बिंदुओं पर अब विभागीय जांच में स्थिति साफ होने की उम्मीद है। फिलहाल इस पूरे मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

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