सटीक डेटा ही सुरक्षित प्रसव की नींव — कलेक्टर प्रतिभा पाल ने स्वास्थ्य अमले को दिए सख्त निर्देश
सागर। जिले में मातृ मृत्यु दर (MMR) और शिशु मृत्यु दर (IMR) को न्यूनतम स्तर पर लाने तथा स्वास्थ्य सूचकांकों में व्यापक सुधार के उद्देश्य से कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल के निर्देशन में जिले के सभी विकासखंडों में मैदानी स्वास्थ्य अमले का ब्लॉक स्तरीय उन्मुखीकरण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसी श्रृंखला में आज मंगलवार को देवरी में ‘सुमन पंचायत’ अंतर्गत मैदानी अमले का मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य उन्मुखीकरण कार्यक्रम संपन्न हुआ। सीएचओ, एएनएम, आशा सहित मैदानी अमले को निर्देश दिए गए हैं कि अनमोल ऐप 2.0 और यू-विन पोर्टल पर शत-प्रतिशत प्रविष्टियां समयबद्ध और त्रुटिरहित दर्ज की जाएं।
कलेक्टर प्रतिभा पाल ने कहा है कि जब आशा, एएनएम और सीएचओ ‘अनमोल ऐप 2.0’ पर 100% सटीक डेटा दर्ज करेंगे तब त्रुटिरहित डेटा से ही समय पर चिकित्सीय देखभाल/ प्रबंधन सुनिश्चित हो सकेगा। बताया गया कि जननी सहायता योजना एवं प्रसूति सहायता योजना (₹4000 की प्रथम किस्त) का लाभ हितग्राहियों तक पारदर्शी तरीके से पहुंचाने के लिए पात्र महिलाओं के वैध ‘समग्र आईडी’ और ‘आधार’ के साथ पोर्टल पर डेटा सत्यापन अनिवार्य किया गया है।
हाई रिस्क प्रेगनेंसी (HRPW) का चिन्हांकन व लाइन लिस्टिंग:
कलेक्टर ने निर्देशित किया कि गर्भवती महिलाओं के पंजीयन की तिथि (LMP) अत्यंत सावधानी से दर्ज करें, ताकि संभावित प्रसव तिथि (EDD) का सही आकलन हो सके। कलेक्टर उन्होंने निर्देश दिए कि हाई रिस्क प्रेगनेंट वूमेन (HRPW) की लाइन लिस्टिंग तैयार कर उसे स्वास्थ्य केंद्रों पर चस्पा करें। गर्भवती महिला को ‘सुमन सखी चैटबॉट’ (9770905942) का अधिक से अधिक उपयोग करने और गर्भवती महिलाओं के परिजनों को भी इससे जोड़ने की बात कही ताकि त्वरित स्वास्थ्य परामर्श और जानकारी मिल सके।
केस स्टडी से समीक्षा
प्रशिक्षण सत्र में पूर्व में हुई मातृ मृत्यु (MDR) की केस स्टडीज का विश्लेषण कर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि उच्च रक्तचाप (Pregnancy Induced Hypertension – PIH) और अन्य जटिलताओं से ग्रस्त माताओं की समय पर पहचान हो। इसके लिए एल्बुमिन किट, बीपी मॉनिटरिंग और पार्टोग्राफ का अनिवार्य उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। संभावित प्रसव तिथि (EDD) से 7 से 15 दिन पूर्व ही उच्च जोखिम वाली माताओं को बर्थ वेटिंग रूम में भर्ती कराएं जिससे उनका आवश्यकतानुसार उपचार और प्रबंधन किया जा सके।
शिशु देखभाल एवं होम विजिट (HBNC) पर विशेष जोर
नवजात शिशुओं की सुरक्षा के लिए गृह आधारित शिशु देखभाल (HBNC) और रूटीन इम्यूनाइजेशन (RI) पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। सामान्य मामलों में 42 दिन एवं क्रिटिकल मामलों में 56 दिन तक नियमित फॉलो-अप लेने के निर्देश स्वास्थ्य विभाग द्वारा दिए गए हैं। इन गृह भेंट के जरिये शिशुवती माता और परिजनों को माता और शिशु की देखभाल और लक्षण के बारे में जानकारी और काउंसलिंग करने के निर्देश दिए गए हैं।
कलेक्टर के निर्देशानुसार जिले के समस्त विकासखंडों के लिए रोस्टर जारी किया गया है। इस प्रशिक्षण में डिलीवरी पॉइंट के नर्सिंग ऑफिसर, सीएचओ, एएनएम, डेटा एंट्री ऑपरेटर, आशा कार्यकर्ता एवं आशा सहयोगी अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशिक्षण सत्रों के सफल संचालन एवं तकनीकी मार्गदर्शन हेतु जिला स्तर से प्रभारी डीआईओ, डीएचओ, नोडल अधिकारी अर्बन, डीपीएम, डीसीएम, एपीएम , सिस्टर ट्यूटर, प्रशिक्षक के रूप में प्रत्येक विकासखंड में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहेंगे।
दायित्वों में लापरवाही पर होगी कड़ी कार्रवाई
कलेक्टर प्रतिभा पाल ने कहा कि, स्वास्थ्य विभाग का जमीनी अमला (आशा, एएनएम, सीएचओ) हमारी मुख्य शक्ति है। यदि मैदानी स्तर पर डेटा और चिन्हांकन में कोई गलती होती है, तो उसका असर सीधे मां और बच्चे की जान पर पड़ता है। इसलिए चिन्हांकन में ज़ीरो एरर सुनिश्चित करें। अगले 3 महीनों के भीतर मैदानी स्तर पर गुणात्मक सुधार न दिखने पर दोषी कर्मचारियों व अधिकारियों के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कदम उठाए जाएंगे। प्रशिक्षण सत्र में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री विवेक केवी , देवरी एसडीएम श्री मुनव्वर खान, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ देवेश पटेरिया सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी और मैदानी अमला मौजूद रहा।


