नारी शिक्षा की अग्रदूत सावित्री बाई फुले को नमन- रघु ठाकुर
सागर। आज स्व. सावित्रीबाई फुले का जन्मदिन है। उन्होंने महिला शिक्षा की शुरुआत 19वीं सदीं में की थी और उसके लिए सामाजिक संघर्ष किया था। 19 सदीं मे किसी महिला का अपने घर आंगन से बाहर निकलना भी बड़ी बात होती थी परंतु उन्होंने सारा अपमान सहकर भी लड़कियों के स्कूल खोले और उन्हें शिक्षा की ओर प्रेरित किया । उनके इस शिक्षा अभियान में फातिमा बेगम का उल्लेख जरूरी है जिन्होंने सावित्रीबाई फुले के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपना योगदान दिया। श्री मति सावित्री बाई फुले ने कभी भी धर्म जाति का भेद नहीं माना तथा सभी जातियों की लड़कियों को पढ़ाया।
स्वर्गीय ज्योति राव फुले ने भी सावित्रीबाई फुले को पूरा सहयोग किया और उन्हें समाज सेवा के लिए और समाज को शिक्षित बनाने के लिए प्रेरित किया।
फुले दंपति ने अंधविश्वासों व कु परंपराओं के खिलाफ भी अभियान चलाया ।न केवल उन्हें मानने से इनकार किया बल्कि समाज को तार्किक बनाने का प्रयास किया। इस के लिए फूले दंपत्ति ने सत्य शोधक समाज की स्थापना की तथा मूर्ति पूजा अंध विश्वास कर्मकांडी परंपराओं का खंडन किया।
लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी श्रद्धा के साथ श्रीमती सावित्रीबाई फुले का स्मरण करती है और उनके शिक्षा और समाज परिवर्तन के योगदान को नमन करती है।

