Friday, January 9, 2026

मप्र में अतिथि विद्वानों के लिए नई उम्मीद, हरियाणा मॉडल पर काम शुरू,सात सदस्यीय समिति करेगी अध्ययन, वेतन बढ़ोतरी और सेवा स्थायित्व की संभावना

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मप्र में अतिथि विद्वानों के लिए नई उम्मीद, हरियाणा मॉडल पर काम शुरू,सात सदस्यीय समिति करेगी अध्ययन, वेतन बढ़ोतरी और सेवा स्थायित्व की संभावना
भोपाल, मध्यप्रदेश। राज्य सरकार विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में कार्यरत अतिथि विद्वानों की स्थिति सुधारने की दिशा में अहम पहल करने जा रही है। उच्च शिक्षा विभाग ने हरियाणा में लागू व्यवस्था को अपनाने की संभावनाओं पर विचार शुरू कर दिया है। इसी उद्देश्य से सात सदस्यीय समिति का गठन किया गया है, जो हरियाणा मॉडल का विस्तृत अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें सरकार को सौंपेगी।
यदि यह मॉडल मध्यप्रदेश में लागू होता है, तो अतिथि विद्वानों को मिलने वाला मानदेय मौजूदा दर से करीब डेढ़ गुना तक बढ़ सकता है। साथ ही उन्हें सेवानिवृत्ति की आयु तक सेवा में बने रहने का अवसर भी मिल सकता है, जिससे वर्षों से चली आ रही अस्थिरता खत्म होने की उम्मीद है।
अस्थायी व्यवस्था में वर्षों से काम कर रहे अतिथि विद्वान
प्रदेश में नियमित प्राध्यापकों की भर्ती लंबे समय से सीमित रही है, जिसके कारण शिक्षकों की कमी बनी हुई है। इसी कमी को पूरा करने के लिए 1990 के दशक में जनभागीदारी समितियों के माध्यम से तदर्थ और अतिथि विद्वानों की नियुक्तियां शुरू की गई थीं। वर्ष 2000 के बाद यह प्रक्रिया और तेज हो गई, लेकिन व्यवस्था आज भी अस्थायी बनी हुई है।
मौजूदा व्यवस्था और चुनौतियां
वर्तमान में मध्यप्रदेश में अतिथि विद्वानों को 2000 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मानदेय दिया जाता है। छुट्टियों का भुगतान नहीं होने के कारण उन्हें औसतन 40 से 44 हजार रुपये प्रतिमाह ही मिल पाते हैं। अवकाश की सुविधा भी सीमित है, जिसमें 13 आकस्मिक और तीन ऐच्छिक अवकाश शामिल हैं। किसी भी रिक्त पद पर नियमित प्राध्यापक की नियुक्ति होते ही अतिथि विद्वानों की सेवाएं समाप्त कर दी जाती हैं, और उनके लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होती।
2023 की घोषणा अब तक अधूरी
वर्ष 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदर्शन कर रहे अतिथि विद्वानों को 50 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय देने की घोषणा की थी। हालांकि, यह निर्णय अब तक लागू नहीं हो पाया है, जिससे अतिथि विद्वानों में निराशा बनी हुई है।
हरियाणा मॉडल से राहत की उम्मीद
जानकारी के अनुसार हरियाणा में पांच वर्ष का अनुभव रखने वाले यूजीसी पात्र अतिथि विद्वानों को 57,700 रुपये मासिक वेतन दिया जा रहा है और उन्हें सेवानिवृत्ति की आयु तक सेवा में बनाए रखने की व्यवस्था है। मप्र अतिथि विद्वान महासंघ के अध्यक्ष डॉ. देवराज सिंह और डॉ. आशीष पांडेय के मुताबिक, प्रदेश में कार्यरत करीब 4500 अतिथि विद्वानों में से लगभग 3700 यूजीसी की पात्रता रखते हैं।
समिति की रिपोर्ट के बाद सरकार द्वारा अंतिम निर्णय लिया जाएगा, जिस पर प्रदेश के हजारों अतिथि विद्वानों की भविष्य की दिशा निर्भर करेगी।

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