Saturday, January 17, 2026

रिश्वत केस की फाइल गायब होने पर हाईकोर्ट सख्त, एफआईआर और विभागीय जांच के आदेश

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रिश्वत केस की फाइल गायब होने पर हाईकोर्ट सख्त, एफआईआर और विभागीय जांच के आदेश

जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने रिश्वत से जुड़े एक प्रकरण की मूल फाइल के लापता होने को बेहद गंभीर मानते हुए कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ ने मामले में तुरंत एफआईआर दर्ज करने के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने के आदेश दिए हैं।
यह मामला जबलपुर लोक निर्माण विभाग (PWD) में पदस्थ रहे हेड क्लर्क अनिल कुमार पाठक से जुड़ा है। लोकायुक्त पुलिस ने 26 अगस्त 2019 को उन्हें एक कर्मचारी से तीन हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था। यह आपराधिक प्रकरण अभी ट्रायल कोर्ट में विचाराधीन है।
आवाज के नमूने से जुड़ा विवाद पहुंचा हाईकोर्ट
ट्रायल कोर्ट ने 17 अक्टूबर 2023 को आदेश पारित करते हुए अनिल कुमार पाठक के आवाज के नमूने से संबंधित दस्तावेजों को रिकॉर्ड पर लेने के निर्देश दिए थे। इसी आदेश को चुनौती देते हुए अनिल कुमार पाठक ने हाईकोर्ट में आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दायर की थी।
सुनवाई के दौरान सामने आई गंभीर चूक
याचिका पर सुनवाई के दौरान लोकायुक्त की ओर से अदालत को बताया गया कि प्रकरण की मूल फाइल उपलब्ध नहीं है और वह गुम हो चुकी है। इस खुलासे पर हाईकोर्ट ने कड़ा संज्ञान लेते हुए लोकायुक्त अधीक्षक को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने के निर्देश दिए।
जांच में दो अधिकारियों ने स्वीकार की जिम्मेदारी
लोकायुक्त एसपी जबलपुर अंजुलता पटले न्यायालय में पेश हुईं। उन्होंने बताया कि फाइल गुम होने के मामले की प्रारंभिक जांच कराई गई है। जांच के दौरान तत्कालीन प्रभारी डीएसपी और मूल पद पर पदस्थ निरीक्षक आस्कर किंडो ने फाइल के गायब होने की जिम्मेदारी स्वीकार की है।
एफआईआर और विभागीय कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश
खंडपीठ ने पुलिस महानिदेशक, विशेष पुलिस स्थापना, भोपाल को आदेश दिया कि दोषी अधिकारी के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कराई जाए। साथ ही तीन दिन के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित अधिकारी की सेवानिवृत्ति को चार वर्ष की अवधि अभी पूरी नहीं हुई है, इसलिए नियमों के तहत उसके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू की जाए।
याचिका वापस, लेकिन आदेश बरकरार
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता जसनीत सिंह होरा ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। हालांकि, हाईकोर्ट ने यह साफ कर दिया कि एफआईआर दर्ज करने और विभागीय जांच से जुड़े सभी निर्देश प्रभावी रहेंगे और उन पर अनिवार्य रूप से अमल किया

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