कोर्ट ने कहा- निजी संतुष्टि के लिए वेश्या की सेवा लेने वाले व्यक्ति पर अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम की धाराओं में मुकदमा नहीं चलाया जा सकता
प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने वेश्यालय में ग्राहक के तौर पर पहुंचे एक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल ग्राहक के रूप में वेश्यालय जाने वाले व्यक्ति पर अनैतिक व्यापार (रोकथाम) कानून, 1956 के तहत मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। अदालत के अनुसार निजी संतुष्टि के लिए किसी महिला को पैसे देना इस कानून के तहत वेश्यावृत्ति के उद्देश्य से खरीद-फरोख्त की श्रेणी में नहीं आता।
यह आदेश जस्टिस गौतम चौधरी ने 11 अगस्त को पारित किया। कोर्ट ने कहा कि जब कोई व्यक्ति वेश्यालय में जाता है तो वह वेश्या से वेश्यावृत्ति करवाने का काम नहीं कर रहा होता, बल्कि अपनी संतुष्टि के लिए उसकी सेवा ले रहा होता है। अदालत ने कहा कि अनैतिक व्यापार (रोकथाम) कानून, 1956 का उद्देश्य वेश्यावृत्ति करवाने और उससे जुड़े शोषण को रोकना है, न कि वेश्या की सेवा लेने वाले हर ग्राहक को अपराधी ठहराना।
धारा 3, 5 और 7 के तहत ग्राहक को आरोपी नहीं माना जा सकता
अदालत ने कहा कि निजी संतुष्टि के लिए पैसे खर्च करने वाले व्यक्ति को अनैतिक व्यापार (रोकथाम) कानून की धारा 3, धारा 5 या धारा 7 के तहत आरोपी नहीं बनाया जा सकता।
कोर्ट के मुताबिक इन धाराओं का संबंध वेश्यालय चलाने या उसका प्रबंधन करने, किसी स्थान को वेश्यालय के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति देने, किसी दूसरे व्यक्ति की वेश्यावृत्ति से होने वाली कमाई पर निर्भर रहने तथा किसी व्यक्ति को यौन शोषण के लिए उपलब्ध कराने, उकसाने या वहां ले जाने जैसे कृत्यों से है।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला दिसंबर 2023 का है। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में पुलिस ने एक मकान पर छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान मौके से 16 लोगों को पकड़ा गया था। इनमें शामिल एक युवक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया और उस पर अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम की धारा 3, 4, 5 और 7 के तहत आरोप लगाए गए।
युवक ने अपने खिलाफ दर्ज मामले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का रुख किया। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि केवल ग्राहक होने के आधार पर इन धाराओं के तहत उसके खिलाफ आरोप कायम नहीं रखे जा सकते।
अदालत ने कहा कि संबंधित कानूनी प्रावधान वेश्यालय चलाने, उसका संचालन या प्रबंधन करने तथा वेश्यावृत्ति से जुड़े अन्य विशिष्ट कृत्यों से संबंधित हैं। इसलिए ग्राहक के खिलाफ इन धाराओं में कार्रवाई कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है।
इस आधार पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने युवक की याचिका स्वीकार कर ली। साथ ही उसके खिलाफ दाखिल आरोपपत्र और उससे जुड़ी आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।


