सागर में रिमझिम बारिश जारी, फिर भी जल संकट की चिंता बरकरार
सागर। मानसूनी सिस्टम सक्रिय होने से सागर जिले में बारिश का दौर जारी है। बुधवार शाम शहर समेत ग्रामीण इलाकों में झमाझम बारिश हुई, जिसके बाद देर रात तक रुक-रुककर बारिश होती रही। बारिश के कारण सड़कों पर पानी बह निकला।
बारिश के चलते तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। सागर का अधिकतम तापमान 28.5 डिग्री और न्यूनतम तापमान 22.3 डिग्री सेल्सियस बना हुआ है।
जिले में इस मानसूनी सीजन में अब तक औसतन 20.8 इंच बारिश दर्ज हुई है। पिछले वर्ष 19 अगस्त तक जिले में 35.1 इंच बारिश हो चुकी थी। इस लिहाज से इस वर्ष पिछले साल की तुलना में करीब 40.6 प्रतिशत कम बारिश हुई है।
जिले की सामान्य वार्षिक बारिश 1230.5 मिमी यानी 48.4 इंच है। अब तक सामान्य बारिश की करीब 42.9 प्रतिशत बारिश ही हुई है। बारिश का सामान्य कोटा पूरा करने के लिए मानसून के शेष 41 दिनों में जिले को औसतन करीब 27.6 इंच बारिश की जरूरत है।
मौसम विभाग के अनुसार 20 से 24 अगस्त के बीच बारिश का असर धीरे-धीरे मध्य और पश्चिमी मध्यप्रदेश तक बढ़ सकता है। अगले 24 घंटों में सागर जिले के अलग-अलग हिस्सों में बारिश होने की संभावना है।
निगम के अनुसार मौजूदा बारिश के दौर में राजघाट जलाशय का जलस्तर करीब 50 इंच बढ़ा है। इसके बावजूद जलापूर्ति लगातार जारी रहने के कारण जलस्तर में अपेक्षित सुधार नहीं हो पा रहा है। यानी जितनी तेजी से जलाशय में पानी पहुंच रहा है, लगभग उसी दौरान शहर की जलापूर्ति के लिए पानी भी निकाला जा रहा है।
बारिश से राजघाट में पानी बढ़ने के बावजूद शहर की बढ़ती पानी की जरूरत के कारण स्थिति में बहुत बड़ा बदलाव नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में पर्याप्त बारिश होना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
गौर करने वाली बात यह है कि राजघाट जलाशय के गहरीकरण और विस्तार को लेकर पूर्व में लगातार घोषणाएं और चर्चाएं होती रही हैं। इसके बावजूद अब तक इन योजनाओं को जमीन पर अपेक्षित गति नहीं मिल सकी है। सवाल यह है कि जब जल संकट पहले से सामने है और शहर की आबादी व पानी की मांग लगातार बढ़ रही है, तो स्थायी समाधान की दिशा में ठोस काम कब शुरू होगा?
बारिश के मौजूदा दौर से फिलहाल कुछ राहत जरूर मिल रही है, लेकिन केवल बारिश के भरोसे जल संकट का स्थायी समाधान संभव नहीं है। राजघाट के गहरीकरण और विस्तार जैसे दीर्घकालीन कार्यों पर समय रहते अमल नहीं हुआ तो आने वाले वर्षों में शहर को फिर पानी की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। अब जरूरत घोषणाओं से आगे बढ़कर राजघाट के गहरीकरण और विस्तार की ठोस कार्ययोजना को जमीन पर उतारने की है।


