MP: सागर के मोतीनगर चौराहे पर करणी सेना कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज और गिरफ्तारियों के बाद अब प्रशासन की कार्रवाई पर तीखे सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि करणी सेना को रोकने में पुलिस ने सख्ती दिखाई, जबकि आजाद समाज पार्टी के दामोदर यादव की सभा को पुलिस सुरक्षा के बीच होने दिया गया जहां से वे अपनी बयानबाजी करते रहें।

मामला यहीं नहीं थमा। भाजपा के अपने खेमे से भी असहमति के स्वर सामने आए। जैसीनगर जनपद पंचायत अध्यक्ष बृजेंद्र सिंह ठाकुर की फेसबुक पोस्ट चर्चा में है—“आज जो हुआ अच्छा नहीं हुआ, 2028-29 में इसका असर देखने को मिलेगा।”
वहीं जनसंघ से जुड़े परिवार से आने वाले डॉ. हेमंत गेहूरास के भाजपा से इस्तीफे की बात सामने आई है। उन्होंने कहा—“अब सागर समेत मप्र में लोकतंत्र नजर नहीं आता।”
अब सवाल यह है कि लोकतंत्र में सभा का अधिकार सिर्फ आयोजकों के लिए है या विरोध करने वालों के लिए भी?

एक तरफ लाठीचार्ज और गिरफ्तारी, दूसरी तरफ सुरक्षा के बीच सभा—सागर में प्रशासन की इस कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब आखिर कौन देगा?
और सबसे बड़ा सवाल—क्या कानून-व्यवस्था के नाम पर कार्रवाई सबके लिए एक जैसी है?

करणी सेना और आजाद समाज पार्टी नेता दामोदर यादव के बीच विवाद की शुरुआत अगस्त 2026 में दामोदर यादव की करणी सेना को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से हुई थी। इसके बाद करणी सेना ने विरोध जताते हुए पुलिस में शिकायत और कार्रवाई की मांग की। सागर में 19 सितंबर को दामोदर यादव की सभा प्रस्तावित होने पर करणी सेना ने इसका विरोध किया और सभा रोकने के लिए सागर पहुंचने का ऐलान किया। तनाव को देखते हुए पुलिस ने करणी सेना के कार्यकर्ताओं को अलग-अलग स्थानों पर रोका, जबकि दामोदर यादव की सभा पुलिस सुरक्षा में हुई।

आजाद समाज पार्टी के दामोदर यादव सागर में सभा करते हुए।


