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सागर में जहरीली शराब कांड की न्यायिक जांच शुरू, 36 मौतों के बाद बंडा पहुंचा आयोग

By: गजेंद्र ठाकुर•
सागर में जहरीली शराब कांड की न्यायिक जांच शुरू, 36 मौतों के बाद बंडा पहुंचा आयोग
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सागर में जहरीली शराब कांड की न्यायिक जांच शुरू, 36 मौतों के बाद बंडा पहुंचा आयोग

तीन महीने में शासन को सौंपी जाएगी रिपोर्ट, आबकारी-पुलिस अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

सागर। जहरीली शराब पीने से 36 लोगों की मौत के मामले में अब न्यायिक जांच शुरू हो गई है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों की जान जाने के बाद राज्य शासन की ओर से गठित एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग शनिवार को बंडा पहुंचा। आयोग की टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाए और मामले से जुड़े कुछ लोगों से बातचीत कर घटनाक्रम की जानकारी ली। अब जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि आखिर जहरीली शराब लोगों तक कैसे पहुंची, मौतों और लोगों के बीमार होने के पीछे वास्तविक कारण क्या थे और जिम्मेदार तंत्र की भूमिका कितनी रही।

हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश विष्णु प्रताप सिंह चौहान की अध्यक्षता में गठित आयोग इस पूरे घटनाक्रम की तथ्यात्मक जांच करेगा। आयोग का मुख्यालय सागर में बनाया गया है, जबकि इसका कार्यालय पुराने आरटीओ कार्यालय परिसर स्थित छात्रावास भवन में स्थापित किया गया है। आयोग अध्यक्ष विष्णु प्रताप सिंह चौहान सागर पहुंच चुके हैं।

बंडा पहुंचकर जुटाए साक्ष्य, विभागों से भी मांगी जा रही जानकारी

शनिवार को आयोग की टीम ने बंडा में घटनाक्रम से जुड़े साक्ष्य जुटाए और कुछ लोगों से बातचीत की। जांच का दायरा केवल घटनास्थल तक सीमित नहीं रहेगा। आयोग बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज सहित संबंधित विभागों से भी जानकारी ले रहा है, ताकि मौतों और बीमारियों के कारणों तथा घटना के दौरान सामने आई परिस्थितियों की कड़ियों को जोड़ा जा सके।

तीन अहम बिंदुओं पर होगी जांच

आयोग मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर जांच करेगा। पहला, जहरीली शराब के सेवन से लोगों की मौत और उनके बीमार होने के वास्तविक कारणों का पता लगाना तथा घटना किन परिस्थितियों में हुई, इसका तथ्यात्मक परीक्षण करना।

दूसरा, संबंधित क्षेत्र के आबकारी अधिकारियों, पुलिसकर्मियों और अन्य जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल करना। इसमें यह देखा जाएगा कि संबंधित अधिकारियों ने अपने निर्धारित दायित्वों का पालन किया था या नहीं।

तीसरा, भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी उपाय सुझाना। आयोग शराब के अवैध कारोबार पर नियंत्रण, निगरानी व्यवस्था और संबंधित विभागों की जवाबदेही को मजबूत करने के लिए सिफारिशें भी दे सकता है।

तीन महीने में शासन को देनी होगी रिपोर्ट

आयोग को जांच पूरी कर तीन महीने के भीतर राज्य शासन को अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि जांच में जहरीली शराब के स्रोत, घटना के कारणों और संबंधित विभागों की भूमिका को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं। हालांकि, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका और लापरवाही के संबंध में अंतिम निष्कर्ष आयोग की जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होंगे।

गजेंद्र ठाकुर
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गजेंद्र ठाकुर

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