पुनर्मतगणना में अंकलेश्वर दुबे को 572 और संजय द्विवेदी को मिले 561 वोट, पूरी प्रक्रिया की कराई गई वीडियोग्राफी
सागर। जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर चल रहा विवाद गुरुवार को पुनर्मतगणना के बाद समाप्त हो गया। रि-काउंटिंग में अधिवक्ता अंकलेश्वर दुबे ने 11 मतों के अंतर से अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की। उन्हें कुल 572 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी अधिवक्ता संजय द्विवेदी को 561 मत प्राप्त हुए।
पुनर्मतगणना की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई। रि-काउंटिंग पूरी होने के बाद अंकलेश्वर दुबे को विजेता घोषित किया गया। उनकी जीत के बाद साथी अधिवक्ताओं ने जश्न मनाया और आतिशबाजी की।
21 अगस्त को हुआ था मतदान
जिला अधिवक्ता संघ के चुनाव के लिए 21 अगस्त को मतदान कराया गया था। इसके बाद 22 अगस्त को मतगणना हुई। मतगणना के दौरान अधिक मत मिलने के आधार पर अधिवक्ता अंकलेश्वर दुबे को विजेता माना जा रहा था। हालांकि, मतगणना में निर्धारित संख्या से अधिक मतपत्र गिने जाने को लेकर आपत्ति सामने आने के बाद अध्यक्ष पद के परिणाम पर विवाद शुरू हो गया।
अधिवक्ता संजय द्विवेदी ने मतों की गिनती में अंतर होने का आरोप लगाते हुए आपत्ति दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि 1350 मतपत्रों के बजाय 1355 मतपत्रों की गिनती की गई है। इसके बाद उन्होंने मामले को लेकर मध्य प्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद में अपील की।
विशेष समिति के आदेश पर हुई पुनर्मतगणना
संजय द्विवेदी की अपील पर मध्य प्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद, जबलपुर की विशेष समिति ने पुनर्मतगणना कराने का आदेश दिया। प्रक्रिया को निष्पक्ष तरीके से पूरा कराने के लिए उच्च न्यायालय जबलपुर के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस संजय द्विवेदी को पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया।
गुरुवार को निर्धारित समय पर रि-काउंटिंग शुरू हुई। पूरी प्रक्रिया के दौरान वीडियो रिकॉर्डिंग कराई गई। मतों की दोबारा गिनती पूरी होने पर अंकलेश्वर दुबे के पक्ष में 572 और संजय द्विवेदी के पक्ष में 561 वोट पाए गए। इस तरह अंकलेश्वर दुबे ने 11 मतों से जीत दर्ज की।
वकीलों के हेल्थ इंश्योरेंस को प्राथमिकता
जीत के बाद नवनिर्वाचित अध्यक्ष अंकलेश्वर दुबे ने कहा, “सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं।” उन्होंने अध्यक्ष पद संभालने के बाद अधिवक्ताओं के हित में काम करने की प्राथमिकताएं भी बताईं।
उन्होंने कहा कि वकीलों के लिए कैशलेस 5 लाख रुपए का हेल्थ इंश्योरेंस कराने का प्रयास प्राथमिकता में रहेगा। इसके साथ ही सीनियर अधिवक्ताओं के लिए पेंशन और नए अधिवक्ताओं को पांच साल तक हर महीने 15 हजार रुपए दिलाने के लिए प्रयास किए जाएंगे।


