मुख्य विषय-वस्तु पर जाएं (Skip to main content)

सागर: IMA का पटना बुजुर्ग में टीबी जांच और सीपीआर प्रशिक्षण का मेगा कार्यक्रम, 47 लोगों की हुई जांच

रिपोर्ट: गजेंद्र ठाकुर
शेयर करें:WhatsAppFacebookX (Twitter)
सागर: IMA का पटना बुजुर्ग में टीबी जांच और सीपीआर प्रशिक्षण का मेगा कार्यक्रम, 47 लोगों की हुई जांच
Sponsor Ad

सागर: IMA का पटना बुजुर्ग में टीबी जांच और सीपीआर प्रशिक्षण का मेगा कार्यक्रम, 47 लोगों की हुई जांच

सागर। रहली विकासखंड के पटना बुजुर्ग स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) सागर और इंडियन सोसायटी ऑफ एनेस्थीसियोलॉजिस्ट्स (आईएसए) सागर के संयुक्त तत्वावधान में टीबी जांच एवं जागरूकता शिविर और सीपीआर का मेगा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीणों को नजदीकी स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी देने के साथ टीबी के लक्षणों, समय पर जांच और आपात स्थिति में जीवन बचाने के लिए सीपीआर की जानकारी देना रहा।

आईएमए सागर अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद ने बताया कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को घर के पास स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सागर जिले में 247 आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित हैं, जहां मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के साथ मधुमेह, ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों की जांच, आवश्यक दवाओं का नि:शुल्क वितरण और टेली-परामर्श की सुविधा उपलब्ध है।

शिविर के दौरान कुल 47 लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई। इसमें रक्त जांच, बलगम जांच और पोर्टेबल डिजिटल एक्स-रे का उपयोग किया गया। जांच में 3 लोगों में टीबी के संभावित लक्षण पाए गए, जिन्हें आगे की जांच और उपचार के लिए चिन्हित किया गया। वहीं 2 नए मधुमेह रोगियों की पहचान कर उन्हें आवश्यक परामर्श दिया गया।

डॉ. तल्हा साद ने ग्रामीणों से लंबे समय से खांसी, बुखार, वजन कम होना, रात में पसीना आना और भूख कम लगने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने की अपील की। उन्होंने कहा कि समय पर जांच और उपचार से टीबी पूरी तरह ठीक हो सकती है और संक्रमण को फैलने से भी रोका जा सकता है। उन्होंने लेटेंट टीबी संक्रमण की पहचान और पात्र लोगों को निवारक उपचार के महत्व की जानकारी भी दी।

कार्यक्रम में मैनिकिन आधारित सीपीआर प्रशिक्षण विशेष आकर्षण रहा। मुख्य प्रशिक्षक डॉ. अजय सिंह ने प्रतिभागियों को अचानक हृदय रुकने की स्थिति में सीपीआर देने की व्यवहारिक जानकारी दी। मैनिकिन पर सीपीआर की प्रक्रिया समझाते हुए उन्होंने बताया कि कार्डियक अरेस्ट के बाद शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। समय पर शुरू किया गया सीपीआर जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

डॉ. तल्हा साद ने कहा कि टीबी की समय पर पहचान और सीपीआर का सही ज्ञान ऐसी महत्वपूर्ण जानकारियां हैं, जो जरूरत के समय किसी की जिंदगी बचा सकती हैं।

कार्यक्रम में जिला क्षय अधिकारी डॉ. आरिफ कुरैशी, डॉ. अभय, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी रविकांत अहीरवार, एएनएम रजनी, पिरामल स्वास्थ्य से आयुषी शुक्ला सहित स्थानीय नागरिकों का सहयोग रहा।

आईएमए और आईएसए सागर के पदाधिकारियों ने बताया कि जनस्वास्थ्य जागरूकता अभियान के तहत भविष्य में भी गांवों, स्कूलों, कॉलेजों, सार्वजनिक स्थानों और कार्यालयों में टीबी जागरूकता एवं सीपीआर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

गजेंद्र ठाकुर
लेखक

गजेंद्र ठाकुर

खबर का असर .com (KKA) डिजिटल टीम - निष्पक्ष और सटीक पत्रकारिता के साथ खबरों की ग्‍लोबल अपडेट्स।