सागर में मुहली गांव में हिरण की लाश मिलने से हड़कंप, गोली मारकर शिकार की आशंका
केसली क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा पर उठे सवाल, अवैध कटाई, शिकार और वन उपज के अवैध परिवहन पर अंकुश लगाने में वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल
सागर। जिले के केसली ब्लॉक अंतर्गत मुहली गांव में एक हिरण की लाश मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों ने खेत-खलिहान के आसपास हिरण का शव पड़ा देखा, जिसके बाद इसकी सूचना वन विभाग को दी गई। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और हिरण के शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की।
प्रारंभिक तौर पर हिरण को गोली मारकर शिकार किए जाने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि हिरण की मौत वास्तव में गोली लगने से हुई है या किसी अन्य कारण से, इसकी पुष्टि पोस्टमार्टम और जांच के बाद ही हो सकेगी। वन विभाग की टीम घटना स्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाने में लगी है।
हिरण की लाश मिलने की घटना ने क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल और वन क्षेत्र में अवैध गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी नहीं होने के कारण शिकारी सक्रिय हो सकते हैं। यदि जांच में हिरण की मौत शिकार के कारण होने की पुष्टि होती है तो यह वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करेगी।
शिकार पर रोक लगाने में वन विभाग की भूमिका पर सवाल
केसली और आसपास के वन क्षेत्रों में वन्यजीवों की मौजूदगी के बावजूद उनकी सुरक्षा को लेकर लगातार चिंता सामने आती रही है। मुहली में हिरण का शव मिलने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि वन क्षेत्रों में नियमित गश्त और निगरानी कितनी प्रभावी है। वन्यजीवों के शिकार पर रोक लगाने के लिए विभाग के पास अमला और संसाधन होने के बावजूद यदि शिकारी जंगल तक पहुंच रहे हैं तो निगरानी व्यवस्था की समीक्षा जरूरी है।
अवैध कटाई और वन उपज के परिवहन पर भी सवाल
स्थानीय स्तर पर जंगलों में अवैध कटाई और वन उपज के अवैध परिवहन को लेकर भी समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जंगलों में सक्रिय अवैध गतिविधियों पर अपेक्षित सख्ती नहीं दिखाई देती। पेड़ों की अवैध कटाई से लेकर वन उपज के अवैध परिवहन तक कई गतिविधियां वन क्षेत्र और वन्यजीवों के लिए खतरा पैदा करती हैं।
हिरण की मौत की घटना को भी इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है। यदि वन क्षेत्रों में अवैध आवाजाही और कटाई पर प्रभावी नियंत्रण हो तो शिकारियों की गतिविधियों पर भी नजर रखना आसान हो सकता है। ऐसे में वन विभाग को केवल घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय संवेदनशील वन क्षेत्रों में नियमित गश्त और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलेगा मौत का राज
फिलहाल वन विभाग की जांच जारी है। हिरण के शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गोली लगने या अन्य किसी चोट के निशान मिलने के बाद ही मौत के वास्तविक कारण की पुष्टि हो सकेगी। यदि शिकार की पुष्टि होती है तो वन विभाग द्वारा वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत जिम्मेदार लोगों की पहचान कर कार्रवाई करना चुनौती होगी।
मुहली गांव में हिरण की लाश मिलने की घटना ने वन्यजीव संरक्षण की जमीनी हकीकत पर बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि वन विभाग जांच को कितनी गंभीरता से आगे बढ़ाता है और क्या हिरण की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों तक पहुंच पाता है।


