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अवैध रूप से गांजे का विक्रय करने वाले आरोपी को 01 वर्ष 06 माह का कठोर कारावास एवं पॉच हजार रूपये अर्थदण्ड

By: Arjun Sagar•
अवैध रूप से गांजे का विक्रय करने वाले आरोपी को 01 वर्ष 06 माह का कठोर कारावास एवं पॉच हजार रूपये अर्थदण्ड
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अवैध रूप से गांजे का विक्रय करने वाले आरोपी को 01 वर्ष 06 माह का कठोर कारावास एवं पॉच हजार रूपये अर्थदण्ड

सागर । अवैध रूप से गांजे का विक्रय करने वाले आरोपी हीरालाल अहिरवार को न्यायालय विषेष न्यायाधीष (अंतर्गत धारा 36 (1) स्वापक औषधि एवं मनः प्रभावी पदार्थ अधिनियम 1985) जिला सागर, श्रीमान अब्दुल्लाह अहमद की न्यायालय ने दोषी करार देते हुये स्वापक औषधि एवं मनः प्रभावी पदार्थ अधिनियम 1985 की धारा- 20(इ)(पप)(ठ) के तहत 01 वर्ष 06 माह का कठोर कारावास एवं पांच हजार रूपये अर्थदण्ड की सजा से दंडित किया है । मामले की पैरवी प्रभारी उप-संचालक (अभियोजन) धर्मेन्द्र सिंह तारन के मार्ग दर्शन में विषेष लोक अभियोजक  संजय कुमार पटैल ने की ।

घटना का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है कि थाना बीना चौकी बजरिया प्रभारी को दिनॉक 22.08.2019 को मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि आरोपी हीरालाल अहिरवार पेंषन आफिस के पीछे वाली गली में गांजा बेचने की फिराक में है । मुखबिर से प्राप्त सूचना के आधार पर वैधानिक कार्यवाही उपरांत हमराह स्टाफ के साथ मुखबिर द्वारा बताये स्थान पर पहुंचे जहॉ लाईट की रोषनी में एक व्यक्ति बैगनी कलर का बेग लिये हुये दिखाई दिया जिसे हमराह स्टॉफ की सहायता से घेराबंदी कर पकड़ा गया, उसका नाम पता पूछने पर अपना नाम हीरालाल अहिरवार निवासी- गणेष वार्ड बीना बताया। आरोपी के बैग की तलाषी में मादक पदार्थ पाया गया जिसे रगड़कर , जलाकर, सूंघकर परीक्षण किया जो गांजा होना पाया गया गांजा को समरस किया गया कुल वजन 04 किलों 100 ग्राम होना पाया गया। जिसका पंचनामा बनाया गया। अभियुक्त का कृत्य 8/20 एन.डी.पी.एस एक्ट के तहत पाये जाने से उसेे गिरफ्तार किया गया। थाने पर प्रकरण पंजीबद्ध कर मामला विवेचना में लिया गया, विवेचना के दौरान साक्षियों के कथन लेख किये गये, घटना स्थल का नक्षा मौका तैयार किया गया अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्रित कर थाना-बीना में धारा-8/20 एन.डी.पी.एस. एक्ट 1985 का अपराध आरोपी के विरूद्ध दर्ज करते हुये विवेचना उपरांत चालान न्यायालय में पेष किया।विचारण के दौरान अभियोजन द्वारा अभियोजन साक्षियों एवं संबंधित दस्तावेजों को प्रमाणित किया गया, अभियोजन ने अपना मामला आरोपी के विरूद्ध संदेह से परे प्रमाणित किया। जहॉ विचारण उपरांत न्यायालय विषेष न्यायाधीष (अंतर्गत धारा 36 (1) स्वापक औषधि एवं मनः प्रभावी पदार्थ अधिनियम 1985)जिला सागर, श्रीमान अब्दुल्लाह अहमद की अदालत ने दोषी करार देते हुये आरोपी को उपरोक्त सजा से दंडित किया है

Arjun Sagar
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Arjun Sagar

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