ज्योतिषाचार्यों के अनुसार राहुकाल में राखी बांधने से बचें, शतभिषा नक्षत्र के साथ बनेंगे सौम्य, बुधादित्य और शुभ कर्तरी योग
भाई-बहन के प्रेम, स्नेह और आपसी विश्वास का पर्व रक्षाबंधन इस बार शुभ संयोगों के बीच मनाया जाएगा। खास बात यह है कि शुक्रवार को पड़ रहे रक्षाबंधन पर भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार बहनें राहुकाल को छोड़कर दिन में निर्धारित शुभ समय पर भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकती हैं।
ज्योतिषाचार्य डाॅ. पूनम वार्ष्णेय के अनुसार शुक्रवार को रक्षासूत्र बांधने के लिए दो प्रमुख शुभ समय रहेंगे। पहला मुहूर्त सुबह 06:20 बजे से 09:49 बजे तक रहेगा। इसके बाद दूसरा शुभ समय दोपहर 12:20 बजे से शाम 04:40 बजे तक रहेगा। वहीं सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक राहुकाल रहेगा। धार्मिक परंपराओं में राहुकाल के दौरान शुभ कार्य करना उचित नहीं माना जाता है, इसलिए इस अवधि में राखी बांधने से बचने की सलाह दी गई है।
ज्योतिषाचार्य डाॅ. अरविंद मिश्रा ने बताया कि इस बार रक्षाबंधन पर सौम्य योग, बुधादित्य योग और शुभ कर्तरी योग का एक साथ बनना विशेष माना जा रहा है। रक्षाबंधन के दिन शतभिषा नक्षत्र रहेगा। इसके साथ ही सूर्य देव अपनी स्वराशि सिंह में और चंद्रमा कुंभ राशि में स्थित रहेंगे। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ऐसे शुभ योगों में बहन द्वारा भाई का तिलक कर रक्षासूत्र बांधने से भाई के जीवन में उन्नति, दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
राखी बांधते समय दिशा का भी रखें ध्यान
रक्षाबंधन की पूजा के दौरान दिशा का विशेष ध्यान रखने की धार्मिक मान्यता है। राखी बांधते समय भाई का मुख पूर्व दिशा की ओर और बहन का मुख उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। मान्यता है कि पूर्व दिशा सूर्य देव से संबंधित है और इससे यश-कीर्ति का आशीर्वाद मिलता है। वहीं उत्तर दिशा को हिमालय और देवताओं का निवास माना गया है, इसलिए इसे सुख-समृद्धि से जोड़ा जाता है।
इस तरह करें रक्षाबंधन की पूजा
राखी बांधने की प्रक्रिया में सबसे पहले भाई के माथे पर रोली और अक्षत यानी चावल से तिलक करें। इसके बाद भाई की दाहिनी कलाई पर रक्षासूत्र बांधें। शुद्ध देसी घी का दीपक जलाकर भाई की आरती उतारें और फिर उन्हें मिठाई खिलाकर मुंह मीठा कराएं। इसके बाद भाई भी अपनी बहन को उपहार दें, उनका मुंह मीठा कराएं और जीवनभर उनकी रक्षा करने का वचन दें।


