पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेजों को लेकर रघु ठाकुर ने सरकार को घेरा, बोले- प्रदेश सरकार भी पूंजीपतियों को सौंप दें
सागर। लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के संरक्षक रघु ठाकुर ने मध्यप्रदेश में पीपीपी मॉडल के तहत संचालित किए जाने वाले मेडिकल कॉलेजों को लेकर प्रदेश सरकार की नीति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सरकार से मेडिकल कॉलेजों को पीपीपी मॉडल से हटाकर सरकारी माध्यम से संचालित करने की नीति पर पुनर्विचार करने की मांग की।
ठाकुर ने कहा कि पीपीपी मॉडल वाले नौ मेडिकल कॉलेजों के लिए अभी निवेशक नहीं मिल पाए हैं, जबकि इनके निर्माण पर करीब 1521 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि इन कॉलेजों में लगभग 300 डॉक्टरों की नियुक्ति भी अटकी हुई है। जिन कॉलेजों के लिए निवेशक मिले हैं, उनके संबंध में मीडिया और अन्य माध्यमों से सामने आ रही सूचनाओं को उन्होंने चिंताजनक बताया।
उन्होंने कहा कि कटनी और भिंड में पीपीपी मॉडल के मेडिकल कॉलेजों का स्थानीय स्तर पर विरोध हुआ है और लोगों ने बंद जैसे कदम उठाकर अपना असंतोष व्यक्त किया है। ऐसे में सरकार को इस नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए।
रघु ठाकुर ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों के निर्माण में केंद्र और राज्य सरकार की हिस्सेदारी का प्रावधान है तथा दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्रों के लिए केंद्र सरकार द्वारा अधिक वित्तीय सहायता देने की नीति भी है। उनके मुताबिक, यदि इसके बावजूद राज्य सरकार मेडिकल कॉलेजों को संचालित नहीं कर पाती है तो यह प्रशासनिक व्यवस्था की कमजोरी का विषय है।
उन्होंने आशंका जताई कि यदि नवनिर्मित भवन लंबे समय तक उपयोग में नहीं आए तो वे जर्जर हो सकते हैं और भविष्य में दोबारा निर्माण पर सरकारी धन खर्च करना पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से इन 13 जिलों के राजनीतिक दलों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों से चर्चा कर सरकारी माध्यम से मेडिकल कॉलेज संचालित करने का रास्ता तलाशने की मांग की।
ठाकुर ने तंज कसते हुए कहा कि यदि सरकार मेडिकल कॉलेजों को खुद बनाने और चलाने में सक्षम नहीं है और इसके लिए बड़े पूंजी निवेशकों की तलाश करनी पड़ रही है, तो फिर व्यंग्य में लोग यह भी कह सकते हैं कि प्रदेश सरकार को ही पीपीपी मॉडल पर बड़े पूंजीपतियों को सौंप दिया जाए।


