जनसुनवाई के दौरान पुलिस की मुस्तैदी से टला बड़ा हादसा, कहा- ‘सिस्टम से हार चुका हूं, मरने पर परिवार को 4 लाख तो मिलेंगे’
मध्य प्रदेश के सागर जिले में मंगलवार को उस वक्त भारी हड़कंप मच गया, जब कलेक्ट्रेट में चल रही जनसुनवाई के बीच एक शख्स ने अचानक खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगाने की कोशिश की। गनीमत रही कि वहां सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों की नजर समय रहते उस पर पड़ गई और उन्होंने फुर्ती दिखाते हुए युवक को पकड़ लिया, जिससे एक बड़ा हादसा होने से बच गया।
आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम उठाने वाले इस शख्स का नाम निलेश चौबे है। वह फिलहाल शहर के बाघराज वार्ड इलाके में एक किराए के मकान में अपने परिवार के साथ गुजर-बसर कर रहा है। जानकारी के मुताबिक, निलेश की कनेरादेव इलाके में पट्टे की एक जमीन है, जिसकी नपाई का मामला काफी अर्से से सरकारी दफ्तरों में अटका पड़ा है। वह अपने इस काम के लिए लगातार राजस्व विभाग और वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यालयों की खाक छान रहा था। महीनों तक चक्कर काटने के बावजूद जब किसी ने उसकी फरियाद नहीं सुनी, तो सिस्टम की इसी बेरुखी से हताश होकर उसने मंगलवार को जनसुनवाई में अपनी जान देने की ठान ली।
पकड़े जाने के बाद अपना दर्द बयां करते हुए निलेश ने कहा, “इस तरह घुट-घुट कर जीने से तो अच्छा है कि मैं मर जाऊं। मेरे मरने के बाद कम से कम सरकार से चार लाख रुपये की आर्थिक मदद तो मिलेगी, जिससे मेरे बीवी-बच्चों का पेट पल सकेगा।” उसने प्रशासन पर तंज कसते हुए यह भी कहा कि अगर अधिकारी उसका काम नहीं कर सकते, तो कलेक्टर साहब उसे कलेक्ट्रेट परिसर में ही रहने की जगह दे दें, ताकि वह वहीं रह सके।
गौरतलब है कि सागर में सरकारी लेटलतीफी और अधिकारियों की अनदेखी से तंग आकर आत्मदाह की कोशिश करने का यह कोई इकलौता मामला नहीं है। बीते कुछ समय में शहर के अंदर अधिकारियों का ध्यान खींचने के लिए खुद पर ‘पेट्रोल उड़ेलने’ का चलन सा बन गया है, जिसे अब स्थानीय स्तर पर लोग ‘पेट्रोल मॉडल’ का नाम देने लगे हैं। अपनी जायज समस्याओं को सुलझाने के लिए दर-दर भटकने को मजबूर आम जनता का हताशा में इस तरह का खौफनाक कदम उठाना, जिले की लचर प्रशासनिक कार्यप्रणाली और सरकारी दावों पर गंभीर सवालिया निशान लगाता है।








