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सागर अधिवक्ता संघ चुनाव: स्वच्छ छवि, मिलनसार व्यवहार और सहयोगी प्रवृत्ति बनी संजय द्विवेदी की पहचान, अध्यक्ष पद की दावेदारी को मिल रहा समर्थन

रिपोर्ट: खबर का असर .कॉम
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सागर अधिवक्ता संघ चुनाव: स्वच्छ छवि, मिलनसार व्यवहार और सहयोगी प्रवृत्ति बनी संजय द्विवेदी की पहचान, अध्यक्ष पद की दावेदारी को मिल रहा समर्थन
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स्वच्छ छवि, मिलनसार व्यवहार और सहयोगी प्रवृत्ति बनी संजय द्विवेदी की पहचान, अध्यक्ष पद की दावेदारी को मिल रहा समर्थन

सागर। जिला अधिवक्ता संघ सागर के वर्ष 2026-28 के चुनाव में अध्यक्ष पद की जंग लगातार दिलचस्प होती जा रही है। चार दावेदारों के बीच मुकाबले में अधिवक्ता संजय द्विवेदी का नाम भी प्रमुखता से सामने आया है। पूर्व में सचिव की जिम्मेदारी संभाल चुके द्विवेदी अपनी स्वच्छ छवि, मिलनसार व्यवहार और सहयोगी प्रवृत्ति के साथ अध्यक्ष पद के लिए चुनाव मैदान में हैं।

अधिवक्ता संजय द्विवेदी को साथी अधिवक्ताओं के बीच सहज, सरल और मिलनसार व्यवहार के लिए जाना जाता है। अधिवक्ताओं से संवाद बनाए रखना और जरूरत के समय सहयोग के लिए उपलब्ध रहना उनकी कार्यशैली का हिस्सा रहा है। यही कारण है कि अध्यक्ष पद की दावेदारी के दौरान वे लगातार व्यक्तिगत संपर्क के माध्यम से अधिवक्ताओं तक पहुंच बना रहे हैं।

सचिव के अनुभव का मिलेगा लाभ

संजय द्विवेदी पूर्व में जिला अधिवक्ता संघ के सचिव की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। इस दौरान उन्हें संगठन की कार्यप्रणाली, अधिवक्ताओं की रोजमर्रा की समस्याओं और संघ से जुड़े विभिन्न विषयों को नजदीक से समझने का अवसर मिला। अध्यक्ष पद की दावेदारी में उनका यही अनुभव एक महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है।

समर्थकों का कहना है कि सचिव पद पर रहते हुए द्विवेदी ने संगठन से जुड़े विषयों को समझने के साथ अधिवक्ताओं के साथ निरंतर संवाद बनाए रखा। अब अध्यक्ष पद के लिए वे इसी अनुभव को आगे बढ़ाने की बात कर रहे हैं।

स्वच्छ छवि और सहज व्यवहार बनी ताकत

चुनावी माहौल में संजय द्विवेदी की स्वच्छ छवि को उनकी प्रमुख ताकत के रूप में देखा जा रहा है। साथी अधिवक्ताओं के बीच उनका व्यवहार सहज और सहयोगी बताया जाता है। वे वरिष्ठ अधिवक्ताओं का सम्मान करने के साथ युवा अधिवक्ताओं के साथ भी संवाद बनाए रखने के लिए जाने जाते हैं।

अधिवक्ता संघ जैसे संगठन में अध्यक्ष की भूमिका केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी तक सीमित नहीं होती, बल्कि अधिवक्ताओं के बीच समन्वय और उनकी समस्याओं को उचित मंच तक पहुंचाना भी महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में संजय द्विवेदी का मिलनसार और सहयोगी व्यवहार उनकी दावेदारी को अलग पहचान दे रहा है।

व्यक्तिगत संपर्क पर जोर

चुनाव में संजय द्विवेदी का अभियान बड़े दावों की बजाय व्यक्तिगत संपर्क और संवाद पर केंद्रित दिखाई दे रहा है। वे अधिवक्ताओं से मुलाकात कर उनकी अपेक्षाओं और समस्याओं को समझने का प्रयास कर रहे हैं। उनके समर्थकों का मानना है कि लंबे समय से अधिवक्ताओं के बीच सक्रिय रहने और सहज उपलब्धता के कारण उन्हें व्यक्तिगत स्तर पर समर्थन मिल रहा है।

चार उम्मीदवारों के बीच मुकाबला

जिला अधिवक्ता संघ के वर्ष 2026-28 के चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए अंकलेश्वर दुबे, कृष्णकांत राय, रामदास राज और संजय द्विवेदी मैदान में हैं। चार उम्मीदवारों के सामने होने से अध्यक्ष पद का मुकाबला चतुष्कोणीय हो गया है। सभी प्रत्याशी अपने-अपने स्तर पर अधिवक्ताओं से संपर्क कर समर्थन जुटाने में लगे हैं।

कुल 49 नामांकन दाखिल

चुनाव प्रक्रिया के तहत विभिन्न पदों के लिए कुल 49 नामांकन फार्म दाखिल किए गए हैं। अध्यक्ष पद के अलावा उपाध्यक्ष, सचिव, सह-सचिव, कोषाध्यक्ष, सह-कोषाध्यक्ष, पुस्तकालयाध्यक्ष और कार्यकारिणी सदस्य पदों के लिए भी उम्मीदवार मैदान में हैं। 12 अगस्त को नामांकन पत्रों की स्क्रूटिनी की गई थी, जबकि 13 अगस्त को नाम वापसी की प्रक्रिया निर्धारित थी।

अब नजर चुनाव परिणाम पर

अध्यक्ष पद की दौड़ में संजय द्विवेदी की स्वच्छ छवि, सचिव पद का अनुभव, मिलनसार व्यवहार और सहयोगी प्रवृत्ति को उनकी प्रमुख ताकत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि अंतिम फैसला अधिवक्ताओं के मत से होगा, लेकिन चुनावी मैदान में उनकी सक्रियता ने मुकाबले को और रोचक बना दिया है। अब देखना होगा कि अधिवक्ताओं के बीच उनका व्यक्तिगत संपर्क और पूर्व संगठनात्मक अनुभव उन्हें जिला अधिवक्ता संघ की कमान तक पहुंचाने में कितना सफल होता है।

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