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कौन हैं डॉ. विशाल चतुर्वेदी? नीम करौरी बाबा की जीवनी को सिल्वर स्क्रीन पर उतारने के लिए 17 साल की रिसर्च

रिपोर्ट: गजेंद्र ठाकुर
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कौन हैं डॉ. विशाल चतुर्वेदी? नीम करौरी बाबा की जीवनी को सिल्वर स्क्रीन पर उतारने के लिए 17 साल की रिसर्च

नीम करौरी बाबा की जीवनी को सिल्वर स्क्रीन पर उतारने का जुनून, OTT के ‘बिग नो’ के बाद भी नहीं मानी हार

सालों की रिसर्च, यात्राओं और लोगों से बातचीत के बाद तैयार हुई फिल्म, ट्रायलॉजी के रूप में सामने आएगी बाबा की कहानी

नीम करौरी बाबा की जीवनी को सिल्वर स्क्रीन पर उतारने का सपना लेकर निर्देशक डॉ. विशाल चतुर्वेदी ने करीब डेढ़ दशक तक मेहनत की। वर्ष 2009 में शुरू हुई रिसर्च वर्ष 2017 तक व्यवस्थित कहानी का रूप लेने लगी। इसके बाद 2023 में रिसर्च का दायरा और बढ़ाया गया। किताबों के अध्ययन के साथ वृंदावन, अकबरपुर, लखनऊ और नीम करौली की यात्राएं की गईं और लोगों से बातचीत के जरिए बाबा से जुड़े प्रसंगों और घटनाओं का डेटा तैयार किया गया।

इसी रिसर्च के आधार पर फिल्म की स्क्रिप्ट तैयार हुई। विशाल ने पहले कहानी को वेब सीरीज के रूप में ओटीटी प्लेटफॉर्म तक पहुंचाने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी। ओटीटी प्लेटफॉर्म संतों की कहानी पर निवेश करने के लिए तैयार नहीं थे। इस अस्वीकृति के बाद विशाल ने फिल्म बनाने का फैसला किया और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद कई वर्षों तक निवेशकों की तलाश करते रहे।

बड़े कलाकारों के नहीं होने के कारण फिल्म में पैसा लगाने के लिए लोग आसानी से तैयार नहीं थे। आखिरकार कुछ लोगों ने विशाल की कहानी और उनके विजन पर भरोसा जताया और फिल्म निर्माण का रास्ता खुला।

फिल्म में नीम करौरी बाबा की भूमिका के लिए भी सामान्य कास्टिंग से अलग दृष्टिकोण अपनाया गया। विशाल चाहते थे कि बाबा का किरदार ऐसा चेहरा निभाए जिसकी पहले से कोई स्थापित स्टार इमेज न हो। साथ ही कलाकार के व्यक्तिगत आचरण और जीवनशैली को भी महत्वपूर्ण माना गया, ताकि किरदार की गरिमा प्रभावित न हो।

विशाल का मानना है कि धार्मिक विषय पर फिल्म बनाने के लिए केवल रिसर्च पर्याप्त नहीं है। विषय के प्रति श्रद्धा और विश्वास भी जरूरी है, क्योंकि ऐसी कहानियां सीधे दर्शकों की आस्था से जुड़ी होती हैं। यही वजह रही कि कलाकारों के चयन में अभिनय क्षमता के साथ उनके व्यवहार और जीवनशैली को भी देखा गया।

फिल्म के सेट पर भी धार्मिक भावनाओं का विशेष ध्यान रखा गया। पूरा सेट शाकाहारी रखा गया। रोज आरती होती थी और हनुमान चालीसा का पाठ किया जाता था।

फिल्म निर्माण के दौरान एक अप्रत्याशित परिस्थिति भी सामने आई। जिस अभिनेता को मुख्य भूमिका के लिए चुना गया था, वह अचानक बीमार पड़ गया। इसके बाद फिल्म के सेकंड असिस्टेंट डायरेक्टर शोभिनव सत्य, जो प्रॉप्स सहित अन्य जिम्मेदारियां संभाल रहे थे, को मुख्य भूमिका निभाने का अवसर मिला। फिल्म से जुड़े लोगों के अनुसार, यह मानो हनुमान बाबा की ही इच्छा थी कि शोभिनव इस भूमिका में आएं।

फिल्म की सबसे बड़ी चुनौती नीम करौरी बाबा को केवल चमत्कारिक छवि तक सीमित न रखना थी। निर्देशक विशाल ने बाबा की लीलाओं के साथ उनकी मानवीय संवेदनाओं, करुणा, सेवा और समाज में आए बदलाव को कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया। यही रचनात्मक दृष्टिकोण फिल्म को महज एक धार्मिक कथा के बजाय एक मानवीय और सामाजिक कहानी का रूप देता है।

फिल्म को दर्शकों की ओर से धीरे-धीरे अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है और बॉक्स ऑफिस पर भी फिल्म ने अपनी पकड़ बनाए रखी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार फिल्म अब तक करीब 12 करोड़ रुपये की कमाई कर चुकी है।

विशाल चतुर्वेदी ने नीम करौरी बाबा की जीवनी को ट्रायलॉजी के रूप में पर्दे पर उतारने की योजना बनाई है। यानी कहानी के अभी दो और भाग सामने आने हैं। भारतीय सिनेमा में सनातनी संतों और आध्यात्मिक व्यक्तित्वों की जीवन यात्राओं पर अपेक्षाकृत कम फिल्में बनी हैं। ऐसे में विशाल का यह प्रयास उन फिल्मकारों के लिए भी रास्ता खोल सकता है, जो संतों और आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़ी कहानियों पर लंबे समय से रिसर्च कर रहे हैं।

‘हनुमान अंश’ इसी प्रयास की एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में सामने आई है। फिल्म नीम करौरी बाबा की लीलाओं को केवल चमत्कार के नजरिए से नहीं, बल्कि सेवा, करुणा और सामाजिक परिवर्तन के संदर्भ में प्रस्तुत करने का प्रयास करती है। यही पहल फिल्म को दर्शकों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

फिल्म ‘हनुमान अंश’ में मुख्य भूमिका (लीड रोल) शोभिनव सत्या ने निभाई है। उन्होंने फिल्म में महान संत नीम करोली बाबा का किरदार निभाया है।

शोभिनव सत्या का संक्षिप्त परिचय:

  • डेब्यू फिल्म: अभिनेता के तौर पर ‘हनुमान अंश’ उनकी पहली (डेब्यू) फिल्म है। अपनी पहली ही फिल्म में नीम करोली बाबा के आध्यात्मिक और शांत रूप को पर्दे पर जीवंत करने के लिए उनकी काफी सराहना हो रही है।

  • बैकग्राउंड: एक्टिंग में आने से पहले वे एक फिल्ममेकर और असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में पर्दे के पीछे सक्रिय रहे हैं।

  • अनुभव: उन्होंने 2019 में आई वेब सीरीज ‘रागिनी एमएमएस रिटर्न्स’ में ट्रेनी असिस्टेंट डायरेक्टर और टीवी शो ‘सीआईडी’ में असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम किया था।

इसके अलावा फिल्म में चंदन आनंद (भोंसले के किरदार में) और पूर्णिमा तिवारी भी अहम भूमिकाओं में हैं।

गजेंद्र ठाकुर
लेखक

गजेंद्र ठाकुर

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