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गर्दन दर्द और हाथ के सुन्नपन का सस्ता इलाज, बीएमसी में इंजेक्शन से राहत, लाखों का खर्च बचा

रिपोर्ट: गजेंद्र ठाकुर
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गर्दन दर्द और हाथ के सुन्नपन का सस्ता इलाज, बीएमसी में इंजेक्शन से राहत, लाखों का खर्च बचा
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गर्दन दर्द और हाथ के सुन्नपन का सस्ता इलाज, बीएमसी में इंजेक्शन से राहत

सागर। बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) के एनेस्थीसिया विभाग की पेन क्लिनिक में गर्दन दर्द और हाथ में सुन्नपन से परेशान मरीजों का सर्वाइकल एपिड्यूरल स्टेरॉयड इंजेक्शन के माध्यम से इलाज किया जा रहा है। इस उपचार से मरीजों को राहत मिल रही है और गंभीर मामलों में होने वाले लाखों रुपये के खर्च वाले उपचार की तुलना में यह एक सस्ता उपचार विकल्प बताया गया है।

गौरझामर निवासी सावित्री साहू गर्दन के दर्द के साथ कलाई तक दर्द और हाथ में सुन्नपन की समस्या से परेशान थीं। बीएमसी में उनकी जांच के बाद सर्वाइकल एपिड्यूरल स्टेरॉयड इंजेक्शन लगाया गया, जिसके बाद उन्हें दर्द और सुन्नपन में राहत मिली।

एनेस्थीसिया विभाग की पेन क्लिनिक में गर्दन की नसों पर दबाव, सर्वाइकल स्पाइन से संबंधित दर्द और हाथ तक जाने वाले दर्द की समस्या वाले मरीजों का चिकित्सकीय मूल्यांकन के बाद उपचार किया जा रहा है। कई मरीज लंबे समय तक दर्द की दवाएं और फिजियोथेरेपी लेते हैं। कुछ मामलों में समस्या गंभीर होने पर ऑपरेशन की आवश्यकता भी पड़ सकती है। ऐसे चयनित मरीजों में सर्वाइकल एपिड्यूरल इंजेक्शन एक उपचार विकल्प के रूप में उपयोग किया जा रहा है।

एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. सर्वेश जैन के अनुसार बीएमसी में अब तक 30 से अधिक मरीजों का इस प्रक्रिया से उपचार किया जा चुका है। विभाग के अनुसार मरीजों को उपचार से लाभ मिला है और अब तक किसी मरीज में साइड इफेक्ट की सूचना नहीं मिली है।

इस प्रक्रिया में केनाकोर्ट नामक दवा का उपयोग किया जाता है। गर्दन के दर्द, हाथ में सुन्नपन या एमआरआई में गर्दन की नसों पर दबाव की समस्या वाले मरीज बीएमसी के एनेस्थीसिया विभाग में चिकित्सकीय परामर्श ले सकते हैं। मरीज की जांच के बाद उपचार की उपयुक्तता तय की जाती है। इंजेक्शन की प्रक्रिया शुक्रवार और शनिवार को की जाती है और करीब एक घंटे बाद मरीज को घर जाने की अनुमति दी जाती है।

खास बात यह है कि इस उपचार के लिए मरीजों को निजी अस्पतालों में लाखों रुपये खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ती। बीएमसी में यह उपचार अपेक्षाकृत कम खर्च में उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को भी राहत मिल सकती है।

हालांकि, यह उपचार हर मरीज के लिए उपयुक्त नहीं होता। मरीज की बीमारी, जांच रिपोर्ट और चिकित्सकीय स्थिति के आधार पर विशेषज्ञ ही तय करते हैं कि सर्वाइकल एपिड्यूरल इंजेक्शन दिया जाना चाहिए या नहीं।

गजेंद्र ठाकुर
लेखक

गजेंद्र ठाकुर

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