हत्या केस में आरोपी दोषमुक्त, उम्रकैद का फैसला रद्द
हाईकोर्ट ने साक्ष्यों के गलत मूल्यांकन पर विशेष न्यायाधीश के खिलाफ कार्रवाई के लिए मामला भेजा
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने हत्या और एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के मामले में आरोपी लोटन लोधी उर्फ नन्ना को दोषमुक्त कर दिया। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति अवनिंद्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने ट्रायल कोर्ट के आजीवन कारावास के फैसले को निरस्त करते हुए कहा कि अभियोजन परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की ऐसी पूरी श्रृंखला स्थापित नहीं कर सका, जिससे आरोपी का अपराध संदेह से परे साबित हो सके।
22-23 मार्च 2024 की हत्या का मामला, परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर टिकी थी पूरी कहानी
मामला मुन्ना अहिरवार की हत्या से जुड़ा था। दमोह के विशेष न्यायाधीश, एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम ने 31 अक्टूबर 2025 को एससीएटीआर क्रमांक 64/2024 में लोटन लोधी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और एससी/एसटी अधिनियम की धारा 3(2)(v) के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ आरोपी ने हाईकोर्ट में आपराधिक अपील क्रमांक 11041/2025 दायर की थी।
एफएसएल रिपोर्ट के गलत उल्लेख पर कोर्ट की गंभीर टिप्पणी
हाईकोर्ट ने मोबाइल हैंडसेट और 300 रुपये के नोटों की बरामदगी सहित अभियोजन द्वारा प्रस्तुत अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर भी संदेह जताया। कोर्ट ने विशेष रूप से एफएसएल रिपोर्ट प्रदर्श पी/26 के गलत उल्लेख को गंभीर माना। रिपोर्ट में आरोपी के पजामा, कमीज और जैकेट पर मानव रक्त नहीं पाया गया था, जबकि ट्रायल कोर्ट ने इन्हें रक्तयुक्त बताया था। हाईकोर्ट ने इस निष्कर्ष को रिकॉर्ड के विपरीत और साक्ष्यों का गलत मूल्यांकन करार दिया।
विशेष न्यायाधीश के विरुद्ध कार्रवाई के लिए मामला कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को भेजा
खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के शारद बिर्धीचंद सारदा बनाम महाराष्ट्र राज्य के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित मामले में घटनाओं से जुड़ी परिस्थितियों की पूरी श्रृंखला साबित होना जरूरी है। इस मामले में यह श्रृंखला अधूरी रही। कोर्ट ने तत्कालीन विशेष न्यायाधीश उदय सिंह मरावी द्वारा साक्ष्यों के मूल्यांकन में गंभीर त्रुटियों पर टिप्पणी करते हुए मामले को उपयुक्त कार्रवाई के लिए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजने का निर्देश दिया।
अपीलार्थी की ओर से अधिवक्ता मदन सिंह ठाकुर ने पैरवी की, जबकि राज्य की ओर से सरकारी अधिवक्ता मानस मणि वर्मा ने पक्ष रखा। हाईकोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए लोटन लोधी उर्फ नन्ना को दोनों धाराओं के आरोपों से दोषमुक्त कर दिया और निर्देश दिया कि यदि किसी अन्य मामले में उसकी आवश्यकता नहीं है तो उसे तत्काल रिहा किया जाए।


