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न्याय तक आसान पहुंच पर मंथन, CM मोहन यादव बोले- हर नागरिक को समय पर और समान न्याय दिलाना सरकार की प्राथमिकता

रिपोर्ट: खबर का असर .कॉम
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न्याय तक आसान पहुंच पर मंथन, CM मोहन यादव बोले- हर नागरिक को समय पर और समान न्याय दिलाना सरकार की प्राथमिकता

न्याय तक आसान पहुंच पर मंथन, CM मोहन यादव बोले- हर नागरिक को समय पर और समान न्याय दिलाना सरकार की प्राथमिकता

इंदौर।इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में 8 अगस्त को Enhancing Access to Justice’ विषय पर वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाईकोर्ट के जजों सहित विधिक सेवा प्राधिकरणों के अधिकारी शामिल हुए।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार हर नागरिक तक न्याय पहुंचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। न्याय केवल अदालतों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज के हर व्यक्ति को समय पर और समान न्याय मिलना जरूरी है। उन्होंने छोटे मामलों को मध्यस्थता के जरिए बातचीत से सुलझाने पर जोर दिया, जिससे अदालतों में लंबित मामलों का बोझ कम किया जा सके।

सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की न्याय व्यवस्था में लगातार बदलाव हो रहे हैं। पुराने और गैर-जरूरी कानूनों को हटाने के साथ ई-केस फाइलिंग, वर्चुअल सुनवाई, डिजिटल डेटा और आधुनिक न्याय प्रबंधन जैसी तकनीकों से न्याय तक पहुंच आसान हुई है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्य प्रदेश में पेपर लीक और धोखाधड़ी जैसे मामलों की तेजी से सुनवाई के लिए इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में चार फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि ये कोर्ट हाईकोर्ट के सहयोग से महज 24 घंटे में तैयार किए गए।

अहिल्याबाई और विक्रमादित्य का दिया उदाहरण

मुख्यमंत्री ने कहा कि न्याय में देरी भी अन्याय के बराबर है। उन्होंने मध्य प्रदेश की न्याय परंपरा का जिक्र करते हुए लोकमाता अहिल्याबाई होलकर और सम्राट विक्रमादित्य के उदाहरण दिए। उन्होंने कहा कि दोनों ने न्याय करते समय व्यक्ति के पद, रिश्ते या स्थिति के बजाय निष्पक्षता को प्राथमिकता दी।

उन्होंने कहा कि अच्छा शासन तभी मजबूत होता है, जब उसमें न्याय और समानता हो। राज्य सरकार सभी धर्मों के सम्मान और प्रत्येक नागरिक के साथ समान व्यवहार के लिए प्रतिबद्ध है।

CJI सूर्यकांत बोले- संवाद से निकलेगा समाधान

भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि न्याय तक पहुंच केवल कानून बनाने से नहीं बढ़ेगी, बल्कि लोगों से संवाद करना भी जरूरी है। किसी व्यक्ति की समस्या समझने के लिए पहले उसकी बात सुनना जरूरी है। उन्होंने मध्यस्थता को इसी सोच का प्रभावी माध्यम बताया।

उन्होंने कहा कि गरीब, महिलाओं, दिव्यांगों और समाज के कमजोर वर्गों को कानूनी सहायता देना दया नहीं, बल्कि उनका अधिकार है। नालसा के माध्यम से जिला और तहसील स्तर तक विधिक सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है।

ब्रेल, साइन लैंग्वेज और AI से न्याय व्यवस्था होगी आसान

सम्मेलन में नालसा की कई नई पहल भी शुरू की गईं। इनमें ब्रेल लिपि में कानूनी गाइड, हिंदी में विधिक सेवा योजनाएं, इंडियन साइन लैंग्वेज में नालसा का थीम सॉन्ग, मध्यस्थता पर सर्टिफिकेट कोर्स और ‘जस्टिस टू चिल्ड्रन लिटिगेशन फेलोशिप’ शामिल हैं।

केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि न्याय केवल अदालतों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल से न्याय व्यवस्था को ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जा सकता है।

सम्मेलन में इस बात पर जोर दिया गया कि संवाद, समानता, सम्मान और आधुनिक तकनीक के जरिए हर व्यक्ति के लिए न्याय पाने का रास्ता आसान बनाया जाए।

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