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गर्ल्स डिग्री कॉलेज के परीक्षा परिणाम विवाद ने लिया नया मोड़, प्राचार्य की शिकायत पर 3 लोगों पर FIR

By: गजेंद्र ठाकुर•
गर्ल्स डिग्री कॉलेज के परीक्षा परिणाम विवाद ने लिया नया मोड़, प्राचार्य की शिकायत पर 3 लोगों पर FIR
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1316 छात्राओं में 194 पास, 999 को सप्लीमेंट्री; प्रदर्शन के बाद पुलिस कार्रवाई से विद्यार्थियों और अभिभावकों में नाराजगी

सागर। गर्ल्स डिग्री कॉलेज सागर में बीए प्रथम वर्ष के परीक्षा परिणाम को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पुलिस कार्रवाई तक पहुंच गया है। कॉलेज में परिणाम को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान धक्का-मुक्की और अभद्रता के आरोप सामने आने के बाद प्राचार्य आनंद तिवारी की शिकायत पर गोपालगंज थाना पुलिस ने सागर साहू, जितेंद्र चौधरी और पीयूष अवस्थी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। एफआईआर में शासकीय कार्य में बाधा डालने, धक्का-मुक्की और अभद्रता सहित अन्य आरोप लगाए गए हैं।

एफआईआर दर्ज होने के बाद मामले को लेकर विद्यार्थियों और अभिभावकों में नाराजगी है। उनका कहना है कि परीक्षा परिणाम को लेकर छात्राओं की ओर से उठाए जा रहे सवालों और कॉलेज प्रबंधन पर लगाए जा रहे आरोपों की जांच करने के बजाय प्रदर्शन से जुड़े लोगों पर कार्रवाई की गई है। विद्यार्थियों का कहना है कि शैक्षणिक संस्थान में परीक्षा परिणाम या अन्य समस्याओं को लेकर छात्राएं सवाल उठाती हैं तो उनकी शिकायतों को सुनकर उनका समाधान किया जाना चाहिए।

1316 में सिर्फ 194 छात्राएं पास

पूरे विवाद की शुरुआत बीए प्रथम वर्ष के परीक्षा परिणाम से हुई। विद्यार्थियों के मुताबिक कॉलेज की 1316 छात्राओं में से महज 194 छात्राएं ही परीक्षा में सफल हुई हैं। वहीं, 999 छात्राओं को सप्लीमेंट्री आई है, जबकि 123 छात्राएं फेल हुई हैं।

परिणाम सामने आने के बाद छात्राओं ने कॉलेज के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में छात्राओं के साथ उनके अभिभावक भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा परिणाम की निष्पक्ष जांच कराने और परिणाम को लेकर कॉलेज प्रबंधन से जवाब मांगा।

इसी विरोध के दौरान प्राचार्य की ओर से पुलिस में शिकायत किए जाने और तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद अब यह मामला और तूल पकड़ता नजर आ रहा है।

छात्राओं का सवाल- खराब रिजल्ट की वजह क्या है?

छात्राओं का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में एक साथ विद्यार्थियों के कई विषयों में फेल या सप्लीमेंट्री होने की स्थिति की निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए। उनका सवाल है कि जो छात्राएं 12वीं की परीक्षा में प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हुईं, उनमें से कई छात्राओं को कॉलेज के प्रथम वर्ष में तीन-चार विषयों में असफल या पूरक क्यों किया गया? विद्यार्थियों के मुताबिक इस पूरे मामले की जांच जरूरी है।

छात्राओं ने यह भी कहा कि सप्लीमेंट्री आने के कारण उन्हें दोबारा परीक्षा देनी होगी और इसके लिए परीक्षा शुल्क भी जमा करना पड़ेगा। उनके अनुसार एक विषय की परीक्षा फीस करीब 400 रुपये है। छात्राओं का दावा है कि यदि 999 विद्यार्थियों को तीन-तीन विषयों की परीक्षा फीस जमा करनी पड़े तो यह राशि लाखों रुपये तक पहुंच सकती है।

इसी को लेकर छात्राओं ने परीक्षा परिणाम, मूल्यांकन प्रक्रिया, सप्लीमेंट्री परीक्षा में शामिल होने वाली छात्राओं की संख्या और उनसे वसूली जाने वाली फीस की जांच की मांग की है।

विद्यार्थियों की मांग- मूल मुद्दे की भी हो जांच

विद्यार्थियों का कहना है कि पूरे मामले को केवल प्रदर्शन के दौरान हुई कथित धक्का-मुक्की या अभद्रता तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि जिस परीक्षा परिणाम को लेकर छात्राएं प्रदर्शन करने के लिए मजबूर हुईं, उसके कारणों की भी जांच होनी चाहिए।

छात्राओं ने प्रशासन से मांग की है कि परीक्षा परिणाम में इतनी बड़ी संख्या में सप्लीमेंट्री और फेल होने के कारणों की पड़ताल की जाए। साथ ही, यदि कॉलेज प्रबंधन पर लगाए गए आरोपों में कोई तथ्य सामने आता है तो उस पर भी कार्रवाई की जाए।

FIR के बाद आमने-सामने आए दोनों पक्ष

एफआईआर दर्ज होने के बाद विद्यार्थियों का कहना है कि उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। विद्यार्थियों और अभिभावकों का आरोप है कि इससे मूल मुद्दा पीछे छूट सकता है।

हालांकि, एफआईआर में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। प्रदर्शन के दौरान वास्तव में क्या हुआ और किन परिस्थितियों में प्राचार्य ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, यह भी जांच का हिस्सा रहेगा। यदि धक्का-मुक्की या शासकीय कार्य में बाधा डालने की घटना हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। वहीं, छात्राओं की ओर से परीक्षा परिणाम और कॉलेज प्रबंधन को लेकर लगाए गए आरोपों की भी जांच की मांग की जा रही है।

प्राचार्य का पक्ष जानने का प्रयास

मामले में कॉलेज प्राचार्य आनंद तिवारी का पक्ष जानने के लिए उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। उनका पक्ष सामने आने के बाद उसे भी प्रकाशित किया जा सकता है।

फिलहाल बीए प्रथम वर्ष के परीक्षा परिणाम से शुरू हुआ विवाद एफआईआर के बाद और गंभीर हो गया है। विद्यार्थियों और अभिभावकों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, जिससे परीक्षा परिणाम को लेकर उठे सवालों के वास्तविक कारण सामने आएं और यदि कहीं लापरवाही हुई है तो जिम्मेदारी तय की जा सके।

अधिकारियों का कहना

क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा विभाग, सागर राजकुमार गोस्वामी ने बताया कि छात्राओं ने कलेक्टर से शिकायत की थी। शिकायत के आधार पर पांच सदस्यीय टीम गठित कर मामले की जांच कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि एफआईआर किस आधार पर दर्ज कराई गई है, इसकी जानकारी वह अगले दिन दे पाएंगे।

राजकुमार गोस्वामी
क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा विभाग, सागर

गजेंद्र ठाकुर
By:

गजेंद्र ठाकुर

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