डॉ. चित्तरंजन ज्योतिषी को राष्ट्रपति के हाथों संगीत नाटक अकादेमी रत्न सम्मान
जनचिंगारी- दिल्ली/सागर। भारतीय संगीत में उल्लेखनीय योगदान के लिए सागर के बन्नाद ग्राम के मूल निवासी एवं वाराणसी निवासी डॉ. चित्तरंजन ज्योतिषी को संगीत नाटक अकादेमी रत्न सम्मान से नवाजा गया। राष्ट्रपति के हाथों मिले इस सम्मान से सागर और बुंदेलखंड का गौरव बढ़ा है।
4 फरवरी 1940 को सागर में जन्मे डॉ. ज्योतिषी ने शिव प्रसाद त्रिपाठी, ओंकारनाथ ठाकुर और बलवंत राय भट्ट जैसे गुरुओं से हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की शिक्षा प्राप्त की। ग्वालियर घराने में प्रशिक्षित डॉ. ज्योतिषी ख्याल, ध्रुपद, ठुमरी और भजन के साथ हारमोनियम व तबला वादन में भी दक्ष हैं।
वे बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रदर्शन कला संकाय में गायन संगीत विभाग के डीन एवं विभागाध्यक्ष तथा राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय, ग्वालियर के संस्थापक कुलपति रह चुके हैं। उन्होंने संगीत शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में लंबे समय तक योगदान दिया और ‘राग कल्पद्रुम का विश्लेषणात्मक अध्ययन’ पुस्तक भी लिखी।
डॉ. ज्योतिषी को इससे पहले संगीत नाटक अकादेमी अमृत पुरस्कार, उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित कई सम्मान मिल चुके हैं। उनकी पुत्री डॉ. सुनीता आदर्श ज्योतिषी का विवाह सागर निवासी पंडित ज्वाला प्रसाद ज्योतिषी के पौत्र से हुआ है।


