लोक सेवा गारंटी के प्रकरण समय-सीमा में निराकृत नहीं करने पर 7 ग्राम पंचायत सचिवों पर कलेक्टर ने की शास्ति अधिरोपित
कलेक्टर श्रीमती पाल पूर्व में ही निश्चित समयावधि में सेवा प्रदाय के दे चुकी हैं निर्देश
सागर। लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम-2010 के तहत निर्धारित समय-सीमा में सेवाओं का निराकरण नहीं करने पर जिले के 7 ग्राम पंचायत सचिवों के विरुद्ध कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल द्वारा शास्ति अधिरोपित की गई है। कलेक्टर श्रीमती पाल द्वारा अधिनियम की धारा 7(1) के तहत प्राप्त अधिकारों का उपयोग करते हुए यह कार्रवाई की गई है।
बता दें कि सिटिजन चार्टर/ लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत आने वाली विभिन्न सेवाओं के संबंध में कलेक्टर श्रीमती पाल पूर्व में ही समय सीमा के अंदर सेवा प्रदाय करने के निर्देश दे चुकी हैं।
जारी आदेश के अनुसार संबंधित ग्राम पंचायत सचिवों द्वारा निर्धारित समय-सीमा में आवेदनों का निराकरण नहीं किया गया। इनमें विवाह पंजीयन, जन्म का अप्राप्यता प्रमाण-पत्र तथा मृत्यु का अप्राप्यता प्रमाण-पत्र प्राप्त करने हेतु आवेदन शामिल हैं। प्रकरणों में निर्धारित समय-सीमा से 3 से 11 दिवस तक विलंब पाया गया।
समय-सीमा से बाहर निराकृत प्रकरणों में सीहोरा जनपद राहतगढ़ के सचिव जगन्नाथ प्रसाद कुर्मी पर 2 हजार 750 रुपये, तेड़ूडाबर जनपद पंचायत जैसीनगर के सचिव रतन सिंह पटेल पर 750 रुपये, पिपरिया जनपद पंचायत जैसीनगर के सचिव महेन्द्र सिंह पर 500 रुपये तथा गंगवारा जनपद पंचायत देवरी के सचिव मिथलेश ब्राह्मण पर 2 हजार रुपये, रायखेड़ा जनपद पंचायत देवरी के सचिव दीपक खटीक पर 5 हजार रुपये, घाना जनपद केसली के सचिव उमाशंकर दुबे पर 2 हजार 500 रुपये तथा तुलसीपार जनपद केसली के सचिव निरंजन खरे पर 1 हजार 750 रुपये की शास्ति अधिरोपित की गई है। इस प्रकार कुल 15 हजार 250 रुपये की शास्ति निर्धारित की गई है।
लोक सेवा गारंटी अधिनियम के प्रावधानों के तहत निर्धारित समय-सीमा में सेवा प्रदान नहीं करने पर संबंधित ग्राम पंचायत के सचिवों के विरुद्ध प्रतिदिन 250 रुपये के मान से शास्ति अधिरोपित की गई है। आदेश में सभी संबंधित सचिवों को शास्ति की राशि चालान के माध्यम से निर्धारित लेखा शीर्ष में जमा कराकर उसकी प्रति कार्यालय में तीन दिवस के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।


