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बंडा शराब कांड में बड़ा सवाल—मनीष लोधी बना यशवंत ठाकुर, आबकारी के सत्यापन पर उठे सवाल

By: गजेंद्र ठाकुर
बंडा शराब कांड में बड़ा सवाल—मनीष लोधी बना यशवंत ठाकुर, आबकारी के सत्यापन पर उठे सवाल
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बंडा शराब कांड में बड़ा सवाल—मनीष लोधी बना यशवंत ठाकुर, आबकारी के सत्यापन पर उठे सवाल

सागर। बंडा शराब कांड में सामने आए तथ्यों ने मध्यप्रदेश की आबकारी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि शराब बनाने का कथित फॉर्मूला बताने वाले और बंडा शराब कांड के मुख्य आरोपियों में शामिल मनीष लोधी ने अपनी पहचान यशवंत ठाकुर के नाम से दर्शाकर शराब दुकान का लाइसेंस हासिल कर लिया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि लाइसेंस जारी करने से पहले आबकारी विभाग के पुलिस सत्यापन में यह पहचान सामने क्यों नहीं आई?

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक मनीष लोधी के खिलाफ पहले से आबकारी अधिनियम की गैर-जमानती धाराओं में मामले दर्ज थे। लाइसेंस प्रक्रिया के दौरान पुलिस सत्यापन में आपराधिक रिकॉर्ड सामने आने की आशंका के चलते उसने यशवंत ठाकुर के नाम का इस्तेमाल किया। जांच में यह भी सामने आया कि बरखेड़ी शराब दुकान का लाइसेंसी यशवंत सिंह और बंडा क्षेत्र में मनीष लोधी अलग-अलग व्यक्ति के रूप में बताए जाते रहे।

रिपोर्ट के अनुसार, मनीष लोधी ने शराब दुकान के संचालन के लिए स्पिरिट, बोतल और लेबल उपलब्ध कराए थे और उसके खिलाफ 11 मामले दर्ज बताए गए हैं। वहीं रवि लखेरा पर शराब बनाने का कथित फॉर्मूला बताने का आरोप है, जबकि चंदू राजा पर जहरीली शराब तैयार करने का आरोप सामने आया है।

अब सवाल सिर्फ बंडा शराब कांड तक सीमित नहीं है—अगर आपराधिक रिकॉर्ड वाला व्यक्ति कथित तौर पर दूसरी पहचान के नाम पर शराब दुकान का लाइसेंस हासिल कर सकता है, तो आबकारी विभाग की लाइसेंस प्रक्रिया और पुलिस सत्यापन व्यवस्था कितनी प्रभावी है? इसकी निष्पक्ष जांच में कई अहम सवालों के जवाब सामने आ सकते हैं।

गजेंद्र ठाकुर
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गजेंद्र ठाकुर

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