सागर। बंडा और शाहगढ़ क्षेत्र में संदिग्ध जहरीली शराब से हुई मौतों और बड़ी संख्या में लोगों के बीमार होने के मामले को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर मुख्यपीठ में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका अधिवक्ता वैभव सिंह की ओर से दायर की गई है। इसमें पूरे मामले की स्वतंत्र फैक्ट फाइंडिंग जांच रिटायर्ड हाईकोर्ट जज की निगरानी में कराने और शराब के अवैध कारोबार की राज्यव्यापी व्यवस्था की समीक्षा की मांग की गई है।
याचिका में कहा गया है कि बंडा और शाहगढ़ तहसील के प्रभावित गांवों में संदिग्ध मिलावटी अथवा जहरीली शराब के सेवन के बाद कई लोगों की मौत और अनेक लोगों के अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति सामने आई। याचिका में यह भी कहा गया है कि शराब में मेथनॉल अथवा अन्य जहरीले पदार्थ की मौजूदगी की बात सामने आई है, लेकिन इसकी अंतिम पुष्टि सक्षम फोरेंसिक, रासायनिक और मेडिकल रिपोर्ट से होना बाकी है।
याचिकाकर्ता हाईकोर्ट के एडवोकेट वैभव सिंह ने आरोपों की स्वतंत्र जांच की जरूरत बताते हुए कहा है कि स्थानीय पुलिस और आबकारी अमले की जांच पर्याप्त नहीं मानी जा सकती, क्योंकि जांच के दायरे में संबंधित विभागों की पूर्व की कार्रवाई, शिकायतों पर कार्रवाई, निरीक्षण और निगरानी की भूमिका भी शामिल है।
अगस्त में नकली शराब की शिकायत का भी उल्लेख
याचिका में दावा किया गया है कि घटना से पहले अगस्त 2026 में क्षेत्र में ‘बॉम्बे’ और ‘सागर गोल्ड’ नाम से नकली शराब के कारोबार की शिकायतें की गई थीं। याचिका में इस शिकायत पर हुई कार्रवाई और कथित निरीक्षण को जांच का विषय बनाने की मांग की गई है। साथ ही 7 सितंबर की मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए आबकारी विभाग की कथित ‘क्लीन चिट’ की परिस्थितियों की भी जांच की मांग की गई है।
पुलिस-आबकारी की भूमिका भी जांच के दायरे में
याचिका में कहा गया है कि जांच केवल शराब बेचने वाले स्थानीय आरोपियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। शराब के निर्माण, कच्चे माल की आपूर्ति, पैकेजिंग, परिवहन, वित्तपोषण, थोक वितरण और खुदरा बिक्री तक पूरी सप्लाई चेन की जांच की जानी चाहिए। संभावित अंतरराज्यीय नेटवर्क और उत्तरप्रदेश के ललितपुर से कथित कनेक्शन की भी निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
रिटायर्ड जज की निगरानी में जांच की मांग
याचिका में हाईकोर्ट से रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र फैक्ट फाइंडिंग इंक्वायरी गठित करने की मांग की गई है। इसके अलावा एसआईटी गठित कर जांच को न्यायालय या स्वतंत्र निगरानी तंत्र की निगरानी में कराने का अनुरोध किया गया है।
मुआवजा और मुफ्त इलाज की मांग
याचिका में शराब से प्रभावित सभी लोगों को तत्काल और लगातार नि:शुल्क उपचार उपलब्ध कराने की मांग की गई है। इसमें मृतकों के परिजनों को मुआवजा तथा घायलों के लिए उपचार, पुनर्वास और अन्य आवश्यक सहायता देने की मांग भी शामिल है।
कलेक्टर और एसपी को हटाने की अंतरिम मांग
याचिका में अंतरिम राहत के तौर पर सागर कलेक्टर/जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक को वर्तमान पदों से तत्काल हटाकर ऐसे अधिकारियों की पदस्थापना करने की मांग की गई है, जिनका घटना या स्थानीय प्रशासन से पूर्व संबंध न रहा हो।
राज्यभर में शराब निगरानी व्यवस्था की समीक्षा
याचिका में मध्यप्रदेश में अवैध, नकली और मिलावटी शराब की रोकथाम के लिए राज्यव्यापी एक्शन प्लान बनाने की मांग की गई है। इसमें लाइसेंस और शराब दुकानों की निगरानी, रैंडम सैंपलिंग, अधिकृत प्रयोगशालाओं में जांच, आबकारी लेबल और बैच नंबर की ट्रैकिंग, विभागों के बीच सूचना साझा करने, अंतरराज्यीय समन्वय और जहरीली शराब की घटनाओं के लिए त्वरित मेडिकल रिस्पांस सिस्टम विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है।


