बुधनी के कोसमी गांव में 12 आदिवासी परिवारों के मकान तोड़ने और मक्का की फसल रौंदने का आरोप, धरना स्थल पर पहुंचे केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों को लगाई फटकार; सीएम मोहन यादव से चर्चा का दिया भरोसा
सीहोर जिले के बुधनी विधानसभा क्षेत्र के कोसमी गांव में 12 आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने और खेतों में खड़ी मक्का की फसल को नुकसान पहुंचाने का मामला गरमा गया है। वन विकास निगम की अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से नाराज प्रभावित परिवार धरने पर बैठ गए। घटना की जानकारी मिलने पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान स्थानीय भाजपा विधायक रमाकांत भार्गव के साथ गांव पहुंचे और पीड़ितों से मुलाकात की। मौके पर परिवारों की स्थिति देखकर उन्होंने नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारियों से फोन पर बात कर तत्काल राहत उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
धरना स्थल पर शिवराज सिंह चौहान जमीन पर बैठकर आदिवासी परिवारों की समस्याएं सुनते नजर आए। इस दौरान कुछ महिलाएं उनसे अपनी पीड़ा बताते हुए रोने लगीं। केंद्रीय मंत्री ने घटना पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि जुल्म और अन्याय की इंतिहां हो गई है। उन्होंने प्रभावित परिवारों को भरोसा दिलाया कि इस मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर चर्चा करेंगे।

बुधनी के कोसमी गांव में हुई कार्रवाई
यह मामला सीहोर जिले की बुधनी विधानसभा क्षेत्र का है। शिवराज सिंह चौहान लंबे समय तक इसी क्षेत्र से विधायक रहे हैं। जानकारी के अनुसार, रविवार को कोसमी गांव में वन विकास निगम ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान 12 आदिवासी परिवारों के मकान तोड़ दिए।
प्रभावित परिवारों का आरोप है कि मकानों को हटाने के साथ खेतों में खड़ी मक्का की फसल भी रौंद दी गई। इसके अलावा एक कुएं को भी भर दिया गया। कार्रवाई के बाद नाराज ग्रामीण धरने पर बैठ गए और अपनी समस्याओं के समाधान की मांग करने लगे।

मामले की जानकारी मिलने पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान भाजपा विधायक रमाकांत भार्गव के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रभावित परिवारों से बातचीत की और उनकी परेशानियां सुनीं। धरने पर बैठे लोगों के बीच पहुंचकर उन्होंने जमीन पर बैठकर चर्चा की और उचित कार्रवाई का भरोसा दिया।
मुख्य सचिव से फोन पर जताई नाराजगी
मौके पर पहुंचने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल को फोन किया। उन्होंने कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि उनके क्षेत्र में अन्याय की हद हो गई है। उन्होंने पीड़ित परिवारों की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि जिन घरों में सुबह बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब चीखें सुनाई दे रही हैं।
केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों को प्रभावित परिवारों के लिए तत्काल रहने और खाने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। साथ ही, उन्होंने नए मकान बनाकर देने की भी बात कही। शिवराज सिंह चौहान ने पीड़ितों को आश्वासन दिया कि वह मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिलकर पूरे मामले पर चर्चा करेंगे, ताकि प्रभावित परिवारों की समस्याओं का समाधान निकाला जा सके।
कांग्रेस ने सरकार को घेरा
आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने के मामले में कांग्रेस ने भी सरकार पर निशाना साधा है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने घटना को लेकर सरकार की आलोचना की और पीड़ितों के पक्ष में आवाज उठाई।
उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि मोहन यादव और मामा के बीच आपसी खींचतान का खामियाजा गरीब आदिवासी परिवारों को भुगतना पड़ रहा है। कांग्रेस ने मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की है।
वन विकास निगम ने बताई कार्रवाई की वजह
दूसरी ओर, वन विकास निगम सीहोर के डीएफओ तरुण कुमार ने कार्रवाई को वैधानिक प्रक्रिया के तहत किया गया कदम बताया है। उनके मुताबिक, लाड़कुई परिक्षेत्र की कोसमी बीट के कक्ष क्रमांक 426 में 183 हेक्टेयर आरक्षित वन क्षेत्र है। इस जमीन पर वर्ष 2021 में पौधरोपण कराया गया था।
डीएफओ के अनुसार, आरक्षित वन क्षेत्र के करीब 32 हेक्टेयर हिस्से पर वर्ष 2022 में अतिक्रमण किया गया था। इसी अतिक्रमण को हटाने के लिए कार्रवाई की गई।
हालांकि, कार्रवाई के दौरान 12 आदिवासी परिवारों के मकान टूटने, फसल को नुकसान पहुंचने और कुएं को भरने के आरोपों के बाद मामला राजनीतिक रूप से तूल पकड़ गया है। एक ओर वन विकास निगम इसे नियमों के तहत की गई कार्रवाई बता रहा है, वहीं दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रभावित परिवारों की स्थिति पर नाराजगी जताते हुए राहत और पुनर्वास के निर्देश दिए हैं। अब इस मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ होने वाली चर्चा और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी।


