पशुपालकों से रखें जीवंत संपर्क, कृत्रिम गर्भाधान एवं वैक्सीनेशन का कार्य तय समय में करें पूर्ण  – कलेक्टर

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पशुपालकों से रखें जीवंत संपर्क, कृत्रिम गर्भाधान एवं वैक्सीनेशन का कार्य तय समय में करें पूर्ण  – कलेक्टर
सागर। कलेक्टर प्रतिभा पाल ने पशुपालन व डेयरी विभाग की विभागीय समीक्षा बैठक में शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं की प्रगति समीक्षा करते हुए कृत्रिम गर्भाधान के लक्ष्य को पूरा करने के निर्देश पशु चिकित्सा अधिकारियों को दिए। उन्होंनें कहा कि पिछली तिमाही और आगामी तिमाही के लक्ष्यों को शीघ्रता से पूरा करें।

कलेक्टर श्रीमती पाल ने समीक्षा के दौरान पशु चिकित्सा अधिकारियों द्वारा कृत्रिम गर्भाधान की प्रगति में संतोषजनक प्रगति नहीं करने एवं बेहद कम प्रदर्शन पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। मैदानी स्तर पर कम प्रदर्शन और घोर लापरवाही पर कड़ी फटकार लगाते हुए कलेक्टर ने सख्त अनुशासनात्मक और दंडात्मक कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सख्त स्वर में कहा कि पशुपालन व डेयरी विभाग  के समस्त कार्यों में नस्ल सुधार और पशुओं के दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हेतु कृत्रिम गर्भाधान सबसे प्रमुख कार्य है, जिसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता या कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने कृत्रिम गर्भाधान के लक्ष्यों की समीक्षा के दौरान लक्ष्य से पीछे चल रहे अधिकारियों पर सख्त रुख अपनाते हुए कृत्रिम गर्भाधान कार्य में शून्य प्रदर्शन करने वाले विकासखंड पशु चिकित्सा अधिकारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। साथ ही 30 प्रतिशत से कम प्रदर्शन करने वाले पशु चिकित्सा अधिकारियों एवं सहायक पशु चिकित्सा अधिकारियों का आगामी वेतन रोकने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त, 10 प्रतिशत से कम प्रदर्शन करने वाले सहायक पशु चिकित्सा अधिकारियों और एक अंकीय (सिंगल डिजिट) प्रदर्शन करने वाले लापरवाह विकासखंड पशु चिकित्सा अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।

कलेक्टर ने सभी पशु चिकित्सा अधिकारियों और सहायक पशु चिकित्सा अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे दफ्तरों से बाहर निकलकर लगातार पशुपालकों के जीवंत संपर्क में रहें और पिछले तीन महीनों के शेष लक्ष्यों के साथ-साथ आगामी लक्ष्यों को समय सीमा में अनिवार्य रूप से पूर्ण करें।

पशुपालकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने वाली डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने बैंकों से निरंतर समन्वय स्थापित कर सभी लंबित प्रकरणों और स्वीकृत कार्यों को एक माह के भीतर निराकृत करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने निर्देशित किया कि तकनीकी या अन्य कारणों से रिजेक्ट किए गए प्रकरणों को बैंक और आवेदक से आपसी समन्वय स्थापित कर पुनः प्रक्रिया में लाया जाए ताकि पात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ मिल सके।

गौशाला प्रबंधन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से उन्होंने कहा कि जिले की जिन भी गौशालाओं में चारे-भूसे के उचित प्रबंधन हेतु आवश्यकता हो, वहां तत्काल स्ट्रॉरीपर की व्यवस्था की जाए। इसके साथ ही, पशुओं को विभिन्न संक्रामक और घातक बीमारियों से बचाने के लिए जिले भर में लगातार वैक्सीनेशन (टीकाकरण) का कार्य लगातार चलाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि पशुधन सुरक्षित और स्वस्थ रह सके।

समीक्षा बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्री विवेक केवी, पशुपालन व डेयरी विभाग से उप संचालक डॉ डी. डी. चढार, पशु प्रजनन कार्यक्रम से डॉ जगदीश बाविसटाले, विकासखंड स्तरीय पशु चिकित्सा विस्तार, पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ एवं सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी (एव्हीएफओ) सहित उपस्थित रहे।

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