MP में फिर गूंजा हनीट्रैप मामला, DIG का नाम सामने आने से बढ़ी हलचल….

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MP में फिर गूंजा हनीट्रैप मामला, DIG का नाम सामने आने से बढ़ी हलचल….

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ब्लैकमेलिंग नेटवर्क की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे, पुलिस ने अलग-अलग ठिकानों पर कार्रवाई कर कई आरोपियों को दबोचा

इंदौर में एक बार फिर हनीट्रैप का मामला सुर्खियों में आ गया है। इस बार मामला इसलिए ज्यादा चर्चा में है क्योंकि इसमें छत्तीसगढ़ पुलिस के DIG स्तर के अधिकारी का नाम सामने आने की बात कही जा रही है। शुरुआती जांच और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार प्रभावशाली लोगों और एक बड़े संगठित नेटवर्क से जुड़े होने की बात सामने आ रही है। इस खुलासे के बाद पुलिस विभाग और राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है।
ब्लैकमेलिंग के लिए चलाया जा रहा था संगठित नेटवर्क
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए श्वेता विजय जैन, रेशू चौधरी और अलका दीक्षित को गिरफ्तार किया है। जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि आरोपी एक सुनियोजित तरीके से काम कर रहे थे। बताया गया कि रेशू चौधरी लोगों से संपर्क स्थापित कर उन्हें अपने जाल में फंसाने का काम करती थी, जबकि भोपाल से श्वेता जैन पूरे नेटवर्क को संचालित कर रही थी।
जांच एजेंसियों के अनुसार, कथित तौर पर आपत्तिजनक वीडियो और डिजिटल सामग्री का इस्तेमाल कर नेताओं, उद्योगपतियों और अधिकारियों पर दबाव बनाया जाता था। पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि इन सामग्रियों के आधार पर करोड़ों रुपये की वसूली की जा रही थी और कुछ वीडियो को आगे बेचने की तैयारी भी चल रही थी।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि दिल्ली और गुजरात के कुछ उद्योगपति तथा वरिष्ठ राजनीतिक व्यक्तियों के नाम भी इस नेटवर्क से जुड़े मामलों में सामने आए हैं। दिल्ली के एक नेता से करीब चार करोड़ रुपये वसूलने की योजना की जानकारी भी जांच के दौरान मिली।
कारोबारी को कथित तौर पर फंसाने की बनाई गई योजना
मामले में शराब कारोबारी हितेंद्र सिंह चौहान का नाम भी सामने आया है। जानकारी के अनुसार, अलका दीक्षित ने हितेंद्र सिंह की मुलाकात लाखन चौधरी से कराई थी। लाखन ने स्वयं को बड़ा कारोबारी बताकर साझेदारी का प्रस्ताव रखा था। आरोप है कि जब कारोबारी ने यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया, तो उन पर दबाव बनाने और धमकाने की कोशिश की गई।
सुपर कॉरिडोर पर मारपीट और रंगदारी मांगने का आरोप
कारोबारी के मुताबिक, अलका, लाखन और उसके बेटे जयदीप ने सुपर कॉरिडोर क्षेत्र में उनकी गाड़ी रोक ली। आरोप है कि वहां उनके साथ मारपीट की गई और कथित वीडियो हटाने के बदले करोड़ों रुपये की मांग की गई। घटना की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हलचल बढ़ गई।
मिशन सीक्रेट’ के तहत हुई कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर 17 मई की रात क्राइम ब्रांच ने “मिशन सीक्रेट” के तहत विशेष अभियान चलाया। करीब 40 प्रशिक्षित जवानों की सात टीमों ने अलग-अलग स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान अलका, जयदीप और लाखन को गिरफ्तार किया गया। वहीं श्वेता जैन को भोपाल से हिरासत में लिया गया।
जांच के दायरे में आया पुलिसकर्मी
मामले की जांच के दौरान हेड कांस्टेबल विनोद शर्मा की भूमिका भी संदिग्ध बताई गई। तकनीकी जांच में पुलिस को ऐसे संकेत मिले कि उन्होंने कथित तौर पर ब्लैकमेलिंग की योजना तैयार करने में सहयोग किया था। पुलिस ने उन्हें सरकारी आवास से हिरासत में लेकर उनका मोबाइल और लैपटॉप जब्त किया है।
आगे और बड़े खुलासों की संभावना
पुलिस उपायुक्त (क्राइम) राजेश त्रिपाठी ने बताया कि अलका दीक्षित का आपराधिक रिकॉर्ड पहले से मौजूद है और जांच में यह भी सामने आया है कि यह गिरोह कई प्रभावशाली और संपन्न लोगों को निशाना बना चुका है। फिलहाल कोर्ट से रिमांड मिलने के बाद आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियों का मानना है कि आने वाले समय में इस मामले से जुड़े और भी महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
यह मामला संगठित अपराध, ब्लैकमेलिंग और प्रभावशाली संपर्कों के जटिल नेटवर्क की ओर इशारा करता है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और आगे की कार्रवाई जारी है।

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