एमपी में फर्जी डॉक्टरों का बड़ा नेटवर्क उजागर, सरगना भोपाल से गिरफ्तार, 50 से ज्यादा संदिग्ध डॉक्टर रडार पर
जबलपुर। मध्य प्रदेश में फर्जी एमबीबीएस डिग्री के सहारे सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में नौकरी करने वाले कथित डॉक्टरों के नेटवर्क का मामला लगातार बड़ा होता जा रहा है। दमोह जिले में तीन फर्जी डॉक्टरों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने अब इस पूरे नेटवर्क के कथित सरगना को भोपाल से गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस रैकेट से जुड़े 50 से अधिक फर्जी डॉक्टर प्रदेशभर में सक्रिय हो सकते हैं।
पुलिस ने भोपाल के कोहेफिजा हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी निवासी हीरा सिंह कौशल को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि वह नेटवर्क का संचालन कर रहा था और फर्जी डिग्रियां तैयार कराने के साथ लोगों को इस गिरोह से जोड़ने का काम करता था।
मामले की जांच अब कई जिलों तक पहुंच गई है। पुलिस भोपाल, ग्वालियर, मुरैना, धार, मंडला और जबलपुर सहित कई स्थानों पर लगातार दबिश दे रही है। अब तक दमोह, जबलपुर और भोपाल से चार आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
वहीं तीन आरोपित डॉक्टरों को बुधवार को दमोह न्यायालय में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया। जांच एजेंसियां पूछताछ के जरिए नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि सबसे पहले मुरैना निवासी अजय मौर्य के लिए कथित तौर पर फर्जी डिग्री तैयार कराई गई थी। इसके बाद उसके संपर्क में आए अन्य लोगों ने भी इसी नेटवर्क के जरिए दस्तावेज बनवाए।
पुलिस के अनुसार, गिरोह द्वारा जीवाजी विश्वविद्यालय और रीवा मेडिकल कॉलेज के नाम पर फर्जी डिग्रियां तैयार किए जाने की जानकारी मिली है। साथ ही मेडिकल रजिस्ट्रेशन नंबरों में कथित छेड़छाड़ के संकेत भी मिले हैं।
इस पूरे मामले ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था और नियुक्ति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि नेटवर्क का असली दायरा कितना बड़ा है और इससे कितने लोग जुड़े हुए हैं।


