पर्यावरण बचाने का संदेश: SP दिनेश कौशल हर दिन चलाते हैं 20 km साइकिल

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15 जिलों की जिम्मेदारी, लेकिन सवारी सिर्फ साइकिल… सागर में पदस्थ SP दिनेश कौशल बने मिसाल

सागर। आमतौर पर पुलिस अधिकारियों की पहचान सरकारी वाहनों के लंबे काफिले और व्यस्त दिनचर्या से होती है, लेकिन सागर में विशेष शाखा में पदस्थ पुलिस अधीक्षक दिनेश कौशल अपनी सादगी, अनुशासन और फिटनेस को लेकर अलग पहचान बना रहे हैं। करीब 15 जिलों की जिम्मेदारी संभालने वाले इस वरिष्ठ अधिकारी का रोजाना साइकिल से सफर करना लोगों के बीच चर्चा और प्रेरणा का विषय बना हुआ है।

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प्रधानमंत्री द्वारा सार्वजनिक परिवहन अपनाने और ईंधन बचाने की अपील के बाद दिनेश कौशल का यह प्रयास और भी खास माना जा रहा है। वे न केवल फिटनेस के लिए बल्कि कार्यालय आने-जाने और अन्य दैनिक कार्यों के लिए भी साइकिल का उपयोग करते हैं।

पुलिस अधीक्षक दिनेश कौशल रोज सुबह योग और व्यायाम से अपने दिन की शुरुआत करते हैं। इसके बाद वे 20 से 25 किलोमीटर तक साइकिलिंग करते हैं। उनकी यह दिनचर्या युवा पुलिसकर्मियों और आम लोगों के लिए भी प्रेरणा बन रही है।

वर्तमान में वे सागर, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना और निवाड़ी सहित कई जिलों की विशेष शाखा की निगरानी कर रहे हैं। इसके अलावा जबलपुर और बालाघाट का अतिरिक्त प्रभार भी उनके पास है। इतने बड़े प्रशासनिक दायित्व के बावजूद उनका सादगीपूर्ण जीवन और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रवैया लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है।

दिनेश कौशल मध्य प्रदेश पुलिस के अनुभवी और सम्मानित अधिकारियों में गिने जाते हैं। जून 2025 में उन्होंने पुलिस अधीक्षक (विशेष शाखा) सागर का पदभार संभाला था। 17 वर्षों से अधिक की सेवा में वे सागर, रीवा, ग्वालियर, दतिया, सिवनी और छिंदवाड़ा सहित कई जिलों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। उन्हें एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के रूप में भी पहचान मिली है।

उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए अगस्त 2024 में राष्ट्रपति सराहनीय सेवा पदक से सम्मानित किया गया। इसके अलावा डकैतों के खिलाफ साहसिक कार्रवाई के लिए राष्ट्रपति वीरता पुलिस पदक, केंद्रीय गृह मंत्रालय का उत्कृष्ट सेवा पदक, मुख्यमंत्री पिस्टल रिवॉर्ड और रुस्तम पिस्टल अवार्ड भी उन्हें मिल चुके हैं।

ऐसे समय में जब देशभर में ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया जा रहा है, दिनेश कौशल का साइकिल से सफर यह संदेश देता है कि यदि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करें, तो उसका सकारात्मक प्रभाव समाज पर निश्चित रूप से पड़ता है।

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