सागर सांसद डॉ. लता वानखेड़े के प्रश्न पर लोकसभा में दी गई जानकारी; ‘ट्रैक-चाइल्ड’ और ‘खोया-पाया’ जैसी सेवाएं अब एक ही प्लेटफॉर्म पर

सागर सांसद डॉ. लता वानखेड़े के प्रश्न पर लोकसभा में दी गई जानकारी; ‘ट्रैक-चाइल्ड’ और ‘खोया-पाया’ जैसी सेवाएं अब एक ही प्लेटफॉर्म पर

सागर/नई दिल्ली |  देश में बाल संरक्षण सेवाओं को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए केंद्र सरकार ने ‘मिशन वात्सल्य’ पोर्टल का नया और उन्नत संस्करण लॉन्च किया है। यह जानकारी केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने लोकसभा में सागर सांसद डॉ. लता गुड्डू वानखेड़े द्वारा बाल परिचर्चा संस्थाओं के आधुनिकीकरण के संबंध में पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म से बढ़ेगी निगरानी केंद्रीय मंत्री ने बताया कि यह नया पोर्टल तकनीकी रूप से पहले से अधिक सुरक्षित और उन्नत है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह राज्य और जिला स्तर की विभिन्न एजेंसियों को एक साझा मंच प्रदान करता है। अब बाल कल्याण समिति (CWC), किशोर न्याय बोर्ड (JJB), और विशेष किशोर पुलिस इकाई (SJPU) जैसी संस्थाएं एक ही डैशबोर्ड के माध्यम से समन्वय कर सकेंगी।

पोर्टल की मुख्य विशेषताएं:

  • समावेश: इसमें पूर्व में संचालित ‘खोया-पाया’ और ‘ट्रैक-चाइल्ड’ पोर्टल को एकीकृत किया गया है।
  • निगरानी: एमआईएस (MIS) डैशबोर्ड के जरिए बच्चों की केस हिस्ट्री और पुनर्वास उपायों की डिजिटल ट्रैकिंग आसान होगी।
  • पारदर्शिता: डेटा की पुनरावृत्ति रुकेगी और संसाधनों का बेहतर नियोजन हो सकेगा।

दत्तक ग्रहण प्रक्रिया हुई सरल सांसद के प्रश्न का उत्तर देते हुए मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार ने किशोर न्याय (संशोधन) अधिनियम 2021 और नए दत्तक ग्रहण विनियमों के माध्यम से गोद लेने की प्रक्रिया को काफी सरल और सुलभ बना दिया है। इसके अतिरिक्त, 18 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद देखरेख संस्थाओं से बाहर आने वाले युवाओं (After Care) को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए वित्तीय सहायता देना भी अनिवार्य किया गया है।

ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष फोकस मिशन वात्सल्य के तहत न केवल तकनीकी सुधार किए जा रहे हैं, बल्कि जमीनी स्तर पर जागरूकता भी बढ़ाई जा रही है। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में बाल लैंगिक शोषण की रोकथाम के लिए स्कूल आधारित गतिविधियों और डिजिटल अभियानों का संचालन किया जा रहा है।

​”यह पोर्टल बाल अधिकारों के संरक्षण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है, जिससे अंतिम छोर पर खड़े बच्चे तक सरकारी सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित होगी।”

— डॉ. लता गुड्डू वानखेड़े, सांसद, सागर

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