राष्ट्र की प्रगति का मार्ग खेतों से होकर गुजरता है – मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव

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राष्ट्र की प्रगति का मार्ग खेतों से होकर गुजरता है – मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव

मध्य प्रदेश में वर्ष 2026 ‘किसान कल्याण वर्ष’ घोषित, कृषि बजट में आत्मनिर्भरता का रोडमैप तैयार

सागर। मध्यप्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 को ऐतिहासिक कदम उठाते हुए ‘किसान कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाने का संकल्प लिया है। विधानसभा में प्रस्तुत बजट के ‘खण्ड-08’ के अनुसार, राज्य सरकार ने कृषि को अर्थव्यवस्था की धुरी मानते हुए एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की है, जिसका उद्देश्य न केवल उत्पादन बढ़ाना है, बल्कि किसान के जीवन में खुशहाली लाना भी है।

संकल्प की पृष्ठभूमि: ‘समृद्ध मध्यप्रदेश @2047’ का विजन

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का मानना है कि राष्ट्र की प्रगति का मार्ग खेतों से होकर गुजरता है। बजट प्रस्तावों में स्पष्ट किया गया है कि “विकसित और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश” की परिकल्पना बिना कृषि के रूपांतरण के अधूरी है। इसी उद्देश्य के साथ आगामी वर्ष को किसान कल्याण के लिए समर्पित किया गया है, ताकि 2047 तक राज्य को कृषि क्षेत्र में वैश्विक मानकों पर खड़ा किया जा सके।

अर्थव्यवस्था में कृषि का बढ़ता कद

बजट दस्तावेजों के अनुसार, मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था देश के अन्य राज्यों की तुलना में विशिष्ट है। राज्य के सकल मूल्य वर्धन (GVA) में कृषि का योगदान साल-दर-साल बढ़ रहा है। वर्ष 2011-12 में यह योगदान जहाँ 30 प्रतिशत था, वह वर्ष 2024-25 में बढ़कर 41 प्रतिशत हो गया है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि कृषि राज्य की आर्थिक मजबूती का सबसे बड़ा आधार है।

सुरक्षा चक्र: केवल उत्पादन नहीं, संरक्षण भी

‘किसान कल्याण वर्ष’ के तहत सरकार ने किसानों के लिए एक अभेद्य सुरक्षा चक्र तैयार किया है। इसमें मुख्य रूप से आर्थिक सुरक्षा,  मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना और फसल बीमा के माध्यम से किसानों को जोखिमों से बचाना।

प्राकृतिक आपदा से राहत  ओलावृष्टि, कीट व्याधि या वन्य जीवों द्वारा फसल क्षति होने पर त्वरित राहत राशि का प्रावधान।

ब्याज मुक्त ऋण: अल्पकालिक ऋणों पर शून्य प्रतिशत ब्याज की निरंतरता ताकि किसान कर्ज के बोझ से दबने के बजाय सशक्त बने।

चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित रणनीति

किसान कल्याण वर्ष के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए बजट में चार प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है:
उत्पादन और उत्पादकता वृद्धि: सिंचाई सुविधाओं का विस्तार (जिसमें पिछले 10 वर्षों में 46% की वृद्धि हुई है) और उन्नत बीजों की उपलब्धता।

सशक्त आदान व्यवस्था: समय पर खाद, उर्वरक और बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करना।

उचित मूल्य की गारंटी: उपार्जन प्रणाली को सुदृढ़ बनाना और गेहूँ जैसी फसलों पर अतिरिक्त बोनस (जैसे ₹125 प्रति क्विंटल) प्रदान करना।

नवाचार और अनुसंधान: ‘Agri Stack’ जैसी डिजिटल तकनीक अपनाना और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना।

मध्यप्रदेश सरकार का यह संकल्प केवल एक घोषणा नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने का एक ब्लूप्रिंट है। ‘किसान कल्याण वर्ष’ के माध्यम से सरकार का लक्ष्य प्रत्येक खेत तक पानी, प्रत्येक हाथ को काम और प्रत्येक किसान को उसकी मेहनत का सही मोल दिलाना है।

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