फार्मर आईडी बनेगी किसान की डिजिटल पहचान, योजनाओं का लाभ लेने के लिए अनिवार्य – कलेक्टर संदीप जी आर
सागर। खेती भारत की रीढ़ है, लेकिन बदलते वक्त के साथ अब खेती का सिस्टम भी डिजिटल हो रहा है। सरकार चाहती है कि किसान को लाइन में खड़ा होकर कागज दिखाने की जरूरत न पड़े, बल्कि उसकी पहचान खुद बोले। इसी सोच के तहत फार्मर आईडी यानी किसान पहचान पत्र लाया गया है, ताकि योजनाओं का फायदा सही किसान तक सही मदद बिना अड़चन पहुंचे।
कलेक्टर श्री संदीप जी आर ने बताया कि फार्मर आईडी किसान की डिजीटल पहचान है। फार्मर आईडी सिर्फ एक कार्ड नहीं, बल्कि किसानों की असली पहचान है। इससे न सिर्फ योजनाएं सही हाथों तक पहुंचेंगी, बल्कि खेती का भविष्य भी ज्यादा पारदर्शी और मजबूत बनेगा। जितनी जल्दी किसान रजिस्ट्रेशन कराएंगे, उतनी जल्दी उन्हें सरकारी मदद का पूरा फायदा मिलेगा। उन्होंने बताया कि जिले में 12 लाख 22610 किसान हितग्राही है जिनमें से आज तक 4 लाख 417 किसानों की फार्मर आईडी चुकी है। उन्होंने शेष किसानों से अपील की है कि वह जल्द से जल्द फार्मर आईडी बनवाएं ताकि भविष्य में सरकारी योजनों का लाभ उन्हें बिना किसी रूकावट के मिल सके। उन्होंने बताया कि पीएम किसान सम्मान निधि और सीएम किसान सम्मान निधि योजना का लाभ लेने के लिए सिर्फ ईकेवाईसी काफी नहीं होगी। किसानों को फार्मर आईडी भी आवश्यक है।
क्या है फार्मर आईडी ?
फार्मर आईडी एक आधार से जुड़ी डिजिटल पहचान है, जिसमें किसान की निजी जानकारी, जमीन का रिकॉर्ड, बोई गई फसल और खेती से जुड़ी गतिविधियां जुड़ी होती हैं। बिल्कुल आधार कार्ड की तरह, लेकिन यह पहचान खास तौर पर किसानों के लिए बनाई गई है। इसका मकसद यह तय करना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ सिर्फ असल और योग्य किसानों को ही मिले।
किसान पहचान पत्र बनवाने के फायदे
फार्मर आईडी से किसान को बार-बार कागज दिखाने की झंझट खत्म होती है। पीएम किसान सम्मान निधि योजना, सीएम किसान सम्मान निधि योजना, फसल बीमा और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) जैसी योजनाओं का लाभ जल्दी और सीधे मिलता है। बीज, खाद और मशीनों पर मिलने वाली सब्सिडी सीधे खाते में पहुंचती है। बैंक लोन, बीमा क्लेम और सरकारी मदद का प्रोसेस तेज होता है और फर्जीवाड़े पर लगाम लगती है।


