प्रशासन पर उठे सवाल : अस्थियां हाथ में लेकर प्रदर्शन, बैरिकेड तोड़ अंदर घुसे लोग
MP के सागर संभाग के दमोह में बुधवार का दिन प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर गया। पन्ना जिले के सिमरिया निवासी मृतक महेंद्र सिंह लोधी के परिजन और सैकड़ों प्रदर्शनकारी उनकी अस्थियां लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे, जिसके बाद पूरा परिसर रणक्षेत्र में बदल गया। करीब 5 से 6 घंटे तक चले उग्र प्रदर्शन ने पुलिस और जिला प्रशासन की तैयारियों की पोल खोल दी।

तस्वीरें चौंकाने वाली थीं—हाथों में अस्थियां, आक्रोशित भीड़, गिरे हुए बैरिकेड्स और बेबस दिखती पुलिस। प्रदर्शनकारियों ने न्याय की मांग करते हुए बैरिकेड तोड़ दिए और नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट परिसर के अंदर घुस गए। इस दौरान धक्का-मुक्की हुई और कुछ महिला पुलिसकर्मियों को हल्की चोटें भी आईं। माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि प्रशासन के हाथ-पांव फूलते नजर आए।
दरअसल, यह पूरा मामला कुछ महीने पहले रनेह स्वास्थ्य केंद्र में हुए विवाद से जुड़ा है। परिजनों का आरोप है कि वहां तैनात नर्स नीलिमा यादव ने बस में महेंद्र को चप्पल मारकर सार्वजनिक रूप से अपमानित किया था। इसके बाद महेंद्र पर लगातार राजीनामा करने का दबाव बनाया जा रहा था। परिवार का कहना है कि इसी मानसिक प्रताड़ना के चलते महेंद्र ने कुछ दिन पहले फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
आज उसकी पत्नी, मासूम बच्चा और समर्थक न्याय की मांग लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। उनकी मुख्य मांग थी कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो, परिवार को न्याय मिले और प्रशासन अपनी जिम्मेदारी तय करे। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि पुलिस और प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की, जिससे महेंद्र की जान चली गई।
स्थिति बिगड़ती देख वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों से बात की। घंटों की गहमागहमी के बाद जिला प्रशासन ने पीड़ित परिवार को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और उचित कार्रवाई की जाएगी।
एएसपी सुजीत भदौरिया ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी और कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, परिजनों का कहना है कि जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होती, उनका संघर्ष जारी रहेगा।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या यह आश्वासन केवल औपचारिकता है, या महेंद्र के परिवार को सचमुच न्याय मिलेगा?


