विश्वविद्यालय में ICIBR-2026 तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेस का उद्घाटन
सागर। तीन दिवसीय इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन इंटीग्रेटेड बायोलॉजिकल रिसर्च (ICIBR-2026) का शुभारंभ बुधवार को मध्य प्रदेश के सागर स्थित डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय (एक केंद्रीय विश्वविद्यालय) में हुआ। इस सम्मेलन का आयोजन स्कूल ऑफ बायोलॉजिकल साइंसेज़ के प्राणीशास्त्र विभाग द्वारा किया जा रहा है। सम्मेलन में देश-विदेश से आए प्रतिष्ठित जीवविज्ञानी, पारिस्थितिकीविद, स्वास्थ्य वैज्ञानिक, शिक्षाविद् तथा युवा शोधकर्ता सहभागी रहे ।
उद्घाटन सत्र अभिमंच सभागार में आयोजित किया गया, जिसकी शुरुआत पुष्प स्वागत के साथ हुई। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वाई. एस. ठाकुर, जो ICIBR-2026 के मुख्य संरक्षक भी हैं, ने मंचासीन विशिष्ट अतिथियों एवं गणमान्य व्यक्तियों का अभिनंदन किया।
अपने संबोधन में प्रो. ठाकुर ने पर्यावरण, स्वास्थ्य, सतत विकास एवं राष्ट्रीय विकास से जुड़ी वर्तमान चुनौतियों के समाधान हेतु अंतरविषयक जैविक अनुसंधान के महत्व पर प्रकाश डाला।
औपचारिक स्वागत भाषण देते हुए प्रो. श्वेता यादव, विभागाध्यक्ष, प्राणीशास्त्र विभाग एवं निदेशक, अनुसंधान एवं विकास, DHSGVV ने मुख्य अतिथि प्रो. मेवा सिंह, (लाइफ-लॉन्ग डिस्टिंग्विश्ड प्रोफेसर, यूनिवर्सिटी ऑफ मैसूर), सहित सभी आमंत्रित वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का हार्दिक स्वागत किया। उन्होंने कहा कि सूक्ष्मजीवों से लेकर प्राइमेट्स तक फैले एकीकृत जैविक अनुसंधान की आज के समय में अत्यंत आवश्यकता है, ताकि जटिल जैविक प्रणालियों को बेहतर ढंग से समझा जा सके।
प्रो. श्वेता यादव ने “विकसित भारत @2047” की परिकल्पना का उल्लेख करते हुए सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में जैविक विज्ञानों की भूमिका पर बल दिया। कुलपति प्रो. वाई. एस. ठाकुर के विचारों का संदर्भ देते हुए उन्होंने उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान में “कौशल प्रबंधन” के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि ICIBR-2026 भारत में एकीकृत जीवविज्ञान अनुसंधान को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।
उन्होंने सीएसआईआर, नासी (भोपाल चैप्टर), यूजीसी, डीआरडीओ, महाकोशल विज्ञान परिषद एवं अन्य सहयोगी संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया, जिनके सहयोग के बिना इस सम्मेलन का आयोजन संभव नहीं हो पाता।
सम्मेलन की थीम एवं उद्देश्यों का परिचय देते हुए डॉ. शाश्वत सिंह ने ICIBR-2026 के वैज्ञानिक दायरे को रेखांकित किया। इस अवसर पर कई प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों—डॉ. एस. पी. गौतम (पूर्व अध्यक्ष, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड), प्रो. यू. के. सरकार (पूर्व निदेशक, NBFGR), प्रो. अप्पा राव (पूर्व कुलपति, हैदराबाद विश्वविद्यालय) तथा प्रो. एस. पी. सिंह (कुलपति, कौशल्या – द स्किल यूनिवर्सिटी) ने अपने विचार साझा किए और जैव विविधता संरक्षण, पर्यावरणीय शासन तथा उच्च शिक्षा में सुधार जैसे विषयों पर प्रकाश डाला।
उद्घाटन सत्र का समापन मुख्य अतिथि प्रो. मेवा सिंह के प्रेरणादायक संबोधन से हुआ, जिसमें उन्होंने नैतिक विज्ञान, दीर्घकालिक पारिस्थितिक सोच तथा उत्तरदायी ज्ञान-साझाकरण के महत्व पर बल दिया। सत्र के अंत में कुलपति प्रो. वाई. एस. ठाकुर ने प्रो. श्वेता यादव एवं उनकी पूरी टीम को इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए बधाई दी। उन्होंने “नेशन फर्स्ट” के नारे के साथ सत्र का समापन किया तथा राष्ट्र की सुरक्षा एवं प्रगति के लिए “शस्त्र और शास्त्र” (जैविक अनुसंधान और जैविक हथियार) दोनों के महत्व को रेखांकित किया।
कार्यक्रम का समापन विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं डॉ. स्मिता शुक्ला द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

