आईएमए सागर ने सीएचसी बण्डा में आयोजित किया सफल रक्तदान शिविर: 36 यूनिट रक्त संग्रहित
सागर। सामाजिक जिम्मेदारी और मानव सेवा की भावना को मजबूत करते हुए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) सागर शाखा एवं स्वास्थ्य विभाग सागर के संयुक्त तत्वावधान में आज सीएचसी बण्डा (रहली) में एक विशेष रक्तदान शिविर का सफल आयोजन किया गया। इस शिविर में बड़ी संख्या में डॉक्टरों, स्वास्थ्य कर्मियों, आशा कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया, जिसके परिणामस्वरूप कुल 36 यूनिट रक्त एकत्र किया गया। यह रक्त विभिन्न अस्पतालों में आपातकालीन स्थितियों, शल्य चिकित्सा, दुर्घटनाओं, कैंसर, एनीमिया जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के जीवन को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए क्षेत्रीय संचालक डॉ. नीना गिडियन ने रक्तदान के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “रक्तदान केवल एक कार्य नहीं, बल्कि जीवनदान है। एक यूनिट रक्त को उसके विभिन्न घटकों—रेड ब्लड सेल्स, प्लाज्मा, प्लेटलेट्स आदि—में विभाजित करने पर यह तीन अलग-अलग मरीजों की जान बचा सकता है। शल्य चिकित्सा, सड़क दुर्घटनाओं, गंभीर रक्ताल्पता और कैंसर जैसी बीमारियों में रक्त की आवश्यकता हर समय बनी रहती है।”
आईएमए सागर के अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद ने अपने संबोधन में रक्तदान के दोहरे लाभ पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “रक्तदान से न केवल प्राप्तकर्ता मरीजों को लाभ मिलता है, बल्कि दाता को भी कई स्वास्थ्यवर्धक फायदे होते हैं। नियमित रक्तदान से शरीर में आयरन का स्तर संतुलित रहता है, जिससे हृदय संबंधी जोखिम कम होता है। साथ ही, रक्तदान के दौरान एचआईवी, हेपेटाइटिस बी एवं सी जैसी बीमारियों की निःशुल्क जांच हो जाती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रक्तदान करने से दाता को मानसिक संतोष और आत्म-सम्मान की अनुभूति होती है। ग्रामीण क्षेत्रों जैसे बण्डा में ऐसे शिविर आयोजित करने से लोगों में रक्तदान को लेकर फैली भ्रांतियां—जैसे ‘रक्त देने से कमजोरी आ जाती है’ या ‘बीमार हो जाएंगे’—दूर होती हैं और लोग आगे आकर सहयोग करते हैं।”
जिला चिकित्सालय सागर के ब्लड बैंक नोडल अधिकारी डॉ एम के जैन ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, “रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प नहीं है और इसे प्रयोगशाला में बनाया भी नहीं जा सकता। इसलिए केवल स्वैच्छिक रक्तदाताओं के माध्यम से ही अस्पतालों में निरंतर और सुरक्षित रक्त आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकती है। ऐसे शिविरों से यह संदेश दूर-दराज के इलाकों तक पहुंचता है कि रक्तदान एक सुरक्षित, सरल और नेक कार्य है।”
शिविर में डॉ.कुलदीप सिंह, डॉ लकी जैन ,डॉ. सजल जैन , डॉ प्राची अग्निहोत्री सहित अन्य चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, आशा कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में आमजन ने सक्रिय भागीदारी की। स्वास्थ्य विभाग और आईएमए के संयुक्त प्रयासों से शिविर सुचारु रूप से चला और सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया गया।
यह आयोजन न केवल रक्त की कमी को पूरा करने में सहायक सिद्ध हुआ, बल्कि सामुदायिक स्तर पर स्वास्थ्य जागरूकता फैलाने और एकजुटता का संदेश देने में भी सफल रहा। आईएमए सागर ने भविष्य में भी ऐसे शिविरों को नियमित रूप से आयोजित करने की योजना बनाई है, ताकि सागर जिले के हर कोने में रक्त उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
रक्तदान एक ऐसा कार्य है जो बिना किसी खर्च के किसी की जान बचा सकता है। यदि आप भी स्वस्थ हैं और 18-65 वर्ष की आयु के बीच हैं, तो निकटतम रक्तदान शिविर में शामिल होकर इस नेक कार्य में भाग लें।

