गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर अभूतपूर्व ‘वंदे मातरम्’ जागरण रैली ने जगाई राष्ट्रभक्ति की अलख

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर अभूतपूर्व ‘वंदे मातरम्’ जागरण रैली ने जगाई राष्ट्रभक्ति की अलख

ऐतिहासिक क्षणों का गवाह बना मकरोनिया, विधायक इंजी.प्रदीप लारिया के नेतृत्व में उमड़ा जनसैलाब

सागर। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर मकरोनिया में देशभक्ति का एक ऐसा भव्य और दिव्य आयोजन देखने को मिला, जिसने हर नागरिक के हृदय को उमंग, उत्साह और राष्ट्रभक्ति से भर दिया।

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नरयावली विधानसभा क्षेत्र के विधायक इंजी. प्रदीप लारिया के आह्वान पर आयोजित ‘वंदे मातरम्’ सम्मान जागरण रैली में जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस विशाल रैली का उद्देश्य राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ के समान सम्मान दिलाना था, और यह आयोजन अपने उद्देश्य में पूरी तरह सफल रहा।

विधायक कार्यालय से भारत माता प्रतिमा तक पैदल यात्रा

रैली का आगाज़ सायंकाल 4 बजे विधायक कार्यालय, रजाखेड़ी से हुआ। डीजे पर अमर राष्ट्र भक्ति गीत और देशभक्ति के नारों के बीच बड़ी संख्या में नागरिकों, प्रतिनिधियों और आयोजकों ने पदयात्रा शुरू की। सभी के चेहरों पर उल्लास और आँखों में देशप्रेम की चमक साफ दिखाई दे रही थी। यात्रा का मार्ग रजाखेड़ी से होते हुए भारत माता प्रतिमा मकरोनिया चौराहा तक निर्धारित था।

भारत माता प्रतिमा पर ओजस्वी उद्बोधन

यात्रा के समापन पर विशेष रूप से भारत माता प्रतिमा स्थल पर एक ओजस्वी और प्रेरणादायक उद्बोधन हुआ। विधायक इंजी. प्रदीप लारिया ने अपने संबोधन में देश की एकता और अखंडता पर जोर देते हुए ‘वंदे मातरम्’ के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया। उनके शब्दों ने उपस्थित जनसमूह में नई ऊर्जा और जोश का संचार किया।

विधायक श्री लारिया ने उपस्थितों को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रभक्तों, भारत माता के इस पावन आँगन में आज हम सब एक संकल्प के साथ एकत्रित हुए हैं। ‘जन गण मन’ हमारी राष्ट्रीय एकता और अखंडता का प्रतीक है, तो ‘वंदे मातरम’ हमारी स्वतंत्रता के संघर्ष की वह चेतना है जिसने सोए हुए राष्ट्र को जगाया था। यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि उन अनगिनत क्रांतिकारियों की अंतिम श्वास का संकल्प है जिन्होंने फाँसी के फंदे को चूमते हुए इसे गुनगुनाया था।

यदि संविधान में राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत को समान गरिमा प्राप्त है, तो हमारे व्यवहार और सम्मान में यह भेदभाव क्यों? जिस ‘वंदे मातरम’ के उद्घोष ने अंग्रेजों की हुकूमत को हिला दिया था, उसे वही संवैधानिक और सार्वजनिक गौरव मिलना चाहिए जो जन-गण-मन को प्राप्त है।

आधुनिक भारत का निर्माण केवल ईंट और पत्थरों से नहीं, बल्कि सांस्कृतिक गौरव से होगा। आइए, आज हम इस मंच से यह मांग बुलंद करें कि राष्ट्रगीत को राष्ट्रगान के समान ही पूर्ण सम्मान दिलाया जाए। जब तक हमारी नई पीढ़ी के हृदय में ‘वंदे मातरम’ की वही गूँज नहीं होगी, तब तक सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का हमारा स्वप्न अधूरा है। नरयावली विधानसभा से इस मांग के आह्वान का श्रीगणेश हुआ है।

आयोजन में सम्मिलित प्रतिनिधि और आयोजक

इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाने में ‘सनातन सद्भाव संगठन भारत (सागर)’ और ‘स्व. प्रकाशचंद जैन मेमोरियल शिक्षा विकास समिति सागर’ की प्रमुख भूमिका रही। संगठन के प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने कंधे से कंधा मिलाकर रैली की व्यवस्था सुनिश्चित की। यह रैली इतनी प्रभावी रही कि जो नागरिक इसमें सम्मिलित नहीं हो सके, उन्हें निश्चित रूप से एक बड़े देशभक्ति कार्यक्रम का हिस्सा न बन पाने का खेद महसूस हुआ होगा।
इस अभूतपूर्व आयोजन ने मकरोनिया में देशभक्ति की एक नई मिसाल कायम की है।
इस अवसर पर जिला अध्यक्ष श्याम तिवारी, नपाध्यक्ष मिहिलाल, अनिल तिवारी, मंडल अध्यक्ष अंकित तिवारी, शारदा खटीक,संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल सेन, एड. महेंद्र कौरव, संतोष राय,अशोक सेन, सुनील सेलट, गिरीशकांत तिवारी,अजय सैनी, पार्षदगण, भाजपा के ज्येष्ठ-श्रेष्ठ पदाधिकारी-कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में मातृशक्ति उपस्थित रहीं।

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