Wednesday, January 14, 2026

मां सरस्वती के पूजन के साथ प्रारंभ हुआ संवेदनशील पुलिसिंग का प्रशिक्षण, दो दिवसीय जोन स्तरीय कार्यशाला का सफल समापन

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मां सरस्वती के पूजन के साथ प्रारंभ हुआ संवेदनशील पुलिसिंग का प्रशिक्षण, दो दिवसीय जोन स्तरीय कार्यशाला का सफल समापन

सागर। समाज के कमजोर एवं संवेदनशील वर्गों के प्रति पुलिस की कार्यशैली को अधिक मानवीय, उत्तरदायी एवं संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से आयोजित दो दिवसीय जोन स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन पुलिस कंट्रोल रूम, सागर में किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम पुलिस महानिरीक्षक सागर जोन श्रीमती हिमानी खन्ना के निर्देशन में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ दिनांक 12 जनवरी 2026 को मां सरस्वती के विधिवत पूजन के साथ पुलिस अधीक्षक (अजाक) सागर सुश्री प्रतिमा पटेल द्वारा किया गया। मां सरस्वती के पूजन के माध्यम से ज्ञान, विवेक एवं संवेदनशीलता के प्रतीक इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की गरिमामय शुरुआत की गई।
उद्घाटन अवसर पर पुलिस अधीक्षक (अजाक) सुश्री प्रतिमा पटेल ने उपस्थित अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि समाज के कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशीलता केवल एक कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि पुलिस की नैतिक, सामाजिक एवं मानवीय जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम पुलिस अधिकारियों को सहानुभूतिपूर्ण, संतुलित एवं प्रभावी निर्णय लेने में सक्षम बनाते हैं, जिससे आमजन का पुलिस पर विश्वास और अधिक सुदृढ़ होता है।
इस जोन स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में सागर, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना एवं निवाड़ी जिलों से आए उप पुलिस अधीक्षक, निरीक्षक एवं उप निरीक्षक स्तर के अधिकारियों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण के दौरान समाज के कमजोर वर्गों से संबंधित कानून, व्यवहारिक चुनौतियां, पुलिस की भूमिका, पीड़ितों से संवाद एवं संवेदनशील पुलिसिंग के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यशाला का समापन
आज दिनांक 13/01/26 को उक्त दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का सफल समापन हुआ। समापन अवसर पर सभी प्रतिभागी अधिकारियों को पुलिस महानिरीक्षक सागर जोन श्रीमती हिमानी खन्ना की ओर से प्रशिक्षण प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।
कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षण से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी, विशेषज्ञ प्रशिक्षकगण एवं विभिन्न जिलों से आए प्रतिभागी अधिकारी उपस्थित रहे। पूरे प्रशिक्षण कार्यक्रम का वातावरण अनुशासित, सकारात्मक एवं प्रेरणादायक रहा।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम पुलिसिंग को और अधिक संवेदनशील, उत्तरदायी एवं जनहितैषी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं प्रभावी कदम सिद्ध हुआ है।

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