हेलमेट न पहनने पर फोर व्हीलर का ई-चालान, नोटिस के बाद गलती सुधार, आपराधिक वारदातों में स्मार्ट कैमरे बेअसर
सागर। शहर में ई-चालान के नाम पर कुछ भी चलता सामने आया हैं, घोर लापरवाही के अनेको उदाहरण सामने आ चुके हैं।
ताजा मामलें में एक फोर व्हीलर वाहन चालक के नाम पर बिना हेलमेट वाहन चलाने का ई-चालान काट दिया गया। मामले के उजागर होने और कानूनी नोटिस भेजे जाने के बाद यातायात पुलिस ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए चालान को निरस्त कर दिया।
दरअसल, यह पूरा मामला नंबर प्लेट की गफलत से जुड़ा है। मोटरसाइकिल का वास्तविक क्रमांक एमपी 19 जेडसी 1563 था, जिसकी नंबर प्लेट स्पष्ट नहीं थी। इसी समानता के चलते ई-चालान सिस्टम में गलती हुई और चालान बोलेरो कार क्रमांक एमपी 15 जेडसी 1563 के नाम जारी हो गया। हैरानी की बात यह रही कि चार पहिया वाहन के नाम पर हेलमेट न पहनने का ₹300 का चालान भेज दिया गया, जबकि चालान में लगी तस्वीर एक टू-व्हीलर की थी।

बताया जा रहा है कि यह बोलेरो वाहन बिलहरा नगर परिषद के उपाध्यक्ष प्रतिनिधि एवं भाजपा नेता इंद्राज सिंह ठाकुर के नाम पर पंजीकृत है। चालान मिलने के बाद वाहन मालिक ने अपने अधिवक्ता कृष्ण प्रताप सिंह राजपूत के माध्यम से सागर स्मार्ट सिटी लिमिटेड एवं यातायात पुलिस को विधिवत नोटिस भेजा।
नोटिस में उल्लेख किया गया कि 5 मार्च 2025 की सुबह करीब 11:20 बजे, पीली कोठी, सिविल लाइन रोड पर बिना हेलमेट वाहन चलाने का चालान जारी किया गया, जबकि संबंधित वाहन चार पहिया बोलेरो नियो एन-10 है। नोटिस में 15 दिनों के भीतर चालान को निरस्त कर लिखित सूचना देने की मांग की गई थी, साथ ही तय समय सीमा में कार्रवाई न होने पर कानूनी कदम उठाने की चेतावनी भी दी गई थी
इंद्राज सिंह के वकील वकील कृष्ण प्रताप सिंह ने जानकारी देते हुए बताया नोटिस मिलने के बाद यातायात पुलिस ने मामले की जांच की और अपनी त्रुटि स्वीकार करते हुए ई-चालान को रद्द कर दिया। इसकी सूचना वाहन मालिक को भी दे दी गई है।
यह मामला सागर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के कैमरों से हो रहे ई-चालानों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। नागरिकों का कहना है कि ऐसी तकनीकी त्रुटियों से आम लोग अनावश्यक रूप से परेशान हो रहे हैं। लोगों ने ई-चालान जारी करने से पहले समुचित सत्यापन और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।
अधिकांश कैमरे बंद पड़े, टेंडर का रोना
शहर में ई- चालान फिलहाल बंद बताये गए हैं कारण टैंडर प्रक्रिय अधर में लटकी हैं वहीं शहर में आपराधिक घटनाओं में सहयोग की बात करें तो यह स्मार्ट कैमरे शोपीस मात्र बने हैं। बीते करीब 3 माह से तमाम सीसीटीवी कैमरे बंद बताये गए हैं। जबकि शहर में अराजकता और अपराध बढ़ते जा रही हैं। सूत्र बताते हैं कि यह अधिकारियों की आपसी खींचातानी के परिणाम हैं जो पुरानी ठेकेदार कंपनी का टैंडर खत्म हो गया और नया टैंडर महीनों से हो नही पा रहा, इन मामलें के प्रभारी अनिल शर्मा से जब बात करनी चाही तो उनका फोन नही लगा।


