बीएमसी में नेत्रदान का क्रम जारी,पोते ने दादा की अंतिम इक्षा पूरी की
सागर। मरणोपरांत नेत्रदान एक ऐसा पुनीत कार्य है, जिससे दो दृष्टिहीन व्यक्तियों को नया जीवन और नए सपनों को देखने का अवसर मिलता है। जिन लोगों की आँखों की पुतली किसी बीमारी, चोट या दुर्घटना के कारण क्षतिग्रस्त हो जाती है और वे अपनी दृष्टि खो देते हैं, उन्हें कोर्निया प्रत्यारोपण के माध्यम से पुनः प्रकाश मिलता है। नेत्रदान पूर्णतः स्वैच्छिक प्रक्रिया है, जिसे मृत्यु के चार से छह घंटों के भीतर सम्पन्न किया जाता है।
ऐसा ही एक प्रेरणादायक उदाहरण सुभाष नगर वार्ड, सिंधी कैंप निवासी स्व. श्री लद्दाराम साजिका (आयु 72 वर्ष) के रूप में सामने आया। शुक्रवार, 28 नवंबर 2025 की रात लगभग 10:30 बजे उनके निधन के तुरंत बाद, दिवंगत के पोते श्री दीपक साजिका ने नेत्रदान हेतु सूचना दी। स्व. श्री लद्दाराम साजिका ने जीवनकाल में नेत्रदान की इच्छा व्यक्त की थी, जिसे उनके पुत्र मनोज, राजकुमार, पुत्री श्रीमती शोभा एवं अन्य परिजनों ने पूर्ण सम्मान के साथ पूरा किया।
सूचना मिलते ही बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज, सागर की आई बैंक टीम द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए, डॉ अंजलि वीरानी पटेल, सहायक प्राध्यापक के समन्वय एवं आई बैंक इंचार्ज, सह-प्राध्यापक, डॉ सारिका चौहान के मार्गदर्शन में टीम को दिवंगत के निवास भेजा गया। परिजनों की लिखित सहमति लेकर, आवश्यक चिकित्सीय सावधानियों के साथ कोर्निया सुरक्षित रूप से निकालकर आई बैंक में संरक्षित किए गए।
बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज, सागर के डीन, प्रो. डॉ. पी. एस. ठाकुर ने कहा—
“नेत्रदान मानवता की सर्वोच्च सेवा है। स्व. श्री लद्दाराम साजिका एवं उनके परिवार ने समाज के लिए प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया है। मैं समस्त नागरिकों से आग्रह करता हूँ कि मानव कल्याण के लिए आगे बढ़ें और नेत्रदान को जीवन का संकल्प बनाएं।”
बुन्देखण्ड चिकित्सा महाविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ सौरभ जैन ने बताया कि इस अवसर पर दिवंगत के पुत्र श्री राजकुमार साजिका ने अपने भाव व्यक्त करते हुए कहा—
“हमने अपने पिता की आँखें दान करने का निर्णय, डॉ अंजलि वीरानी पटेल के प्रेरणादायक उद्बोधन से प्रेरित होकर लिया। मंगलवार, 25 नवंबर 2025 को आयोजित स्व. श्रीमती ताराबाई फबवानी जी की श्रद्धांजलि सभा में डॉ अंजलि द्वारा नेत्रदान पर दिए गए सशक्त विचारों ने हमें एवं पूरे सिंधी समाज को मानवता की सेवा हेतु प्रेरित किया। उनके शब्दों ने समाज में एक मिसाल स्थापित की है।”
नेत्र रोग विभाग के विभागाध्यक्ष, डॉ प्रवीण खरे ने इस महान एवं मानवीय कार्य के लिए दिवंगत के परिवार का हार्दिक आभार व्यक्त किया।
यह उल्लेखनीय है कि बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज, सागर की आई बैंक में कोर्निया प्रत्यारोपण की सुविधा पूर्णतः निःशुल्क उपलब्ध है। नेत्रदान से दो लोगों के जीवन में प्रकाश लौटाया जा सकता है, इसलिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को इस पुनीत कार्य में आगे आना चाहिए।
आई बैंक टीम में डॉ पूजा, डॉ मोदी, डॉ अजय, डॉ रक्षित, नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ सक्रिय रहे।


