Sunday, January 11, 2026

स्वस्थ मन में ही स्वस्थ शरीर निवास करता है- डाॅ प्रतिभा तिवारी

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स्वस्थ मन में ही स्वस्थ शरीर निवास करता है- डाॅ प्रतिभा तिवारी

सागर। सागर इंस्टटीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल साईंसेज (सिप्स) एवं भारतीय स्त्रीषक्ति मध्यप्रदेष, सागर प्रसूति एवं स्त्री रोग सोसायटी के संयुक्त तत्वाधान में एक दिवसीय “किशोर स्वास्थ और हमारी जागरूकता” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसका शुभारंभ दीप प्रज्जवलन के साथ किया गया। तद्ोपरान्त अध्यक्षीय उद्बोधन में भारतीय स्त्रीशक्ति, सागर (मप्र) की प्रदेश उपाध्यक्ष-डाॅ प्रतिभा तिवारी ने कहा कि-एक स्वस्थ जीवन के लिए केवल शरीर का नहीं, बल्कि मन का स्वस्थ होना भी उतना ही आवश्यक है। यही कारण है कि कहा गया है-“मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।”

आज के समय में पढ़ाई का दबाव, प्रतिस्पर्धा, पारिवारिक तनाव, मोबाइल और सोशल मीडिया का प्रभाव – ये सभी चीजें हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल रही हैं। बहुत से लोग तनाव, चिंता और अवसाद (डिप्रेशन) जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं, लेकिन डर या झिझक के कारण वे इसके बारे में खुलकर बात नहीं करते। योग, ध्यान और नियमित व्यायाम करें, मोबाइल और सोशल मीडिया का सीमित उपयोग करें, और सबसे महत्वपूर्ण-जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेने में संकोच न करें। “स्वस्थ मन में ही स्वस्थ शरीर निवास करता है।” वक्तव्य की अगली श्रृंखला में मुख्य वक्ता सागर (मप्र) के पूर्व जिला चिकित्सा अधिकारी, डाॅ शषि ठाकुर ने कहा कि – किशोरावस्था जीवन का वह दौर है जब एक बच्चा धीरे-धीरे वयस्कता की ओर बढ़ता है।

यह समय शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक परिवर्तन का होता है। यही वह अवस्था है जब जीवन की दिशा तय होती है – इसलिए इस समय ’’स्वास्थ्य और जागरूकता दोनों का विशेष महत्व’’ होता है। ’’जागरूकता ही स्वस्थ जीवन की कुंजी है।’’ इसके साथ ही ’’मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य’’ भी उतना ही अहम है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि की आसंदी से सिप्स, सागर (म0प्र0) के प्राचार्य, युवराज सिंह ने कहा कि – किशोर अवस्था में तनाव, आत्म-संदेह, गुस्सा या अकेलापन जैसी भावनाएँ सामान्य होती हैं। ऐसे समय में हमें अपने माता-पिता, शिक्षकों या दोस्तों से खुलकर बात करनी चाहिए। याद रखिए-बात करने से समाधान निकलता है, चुप रहने से नहीं।’ स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मन बसता है, और जागरूक मनुष्य ही सच्चा नागरिक बनता है। वक्तव्य की अगली श्रृंखला में विषिष्ट अतिथि सागर (मप्र) की स्त्रीरोग विषेषज्ञ-डाॅ ज्योति चैहान ने कहा कि – किशोरावस्था जीवन का सबसे महत्वपूर्ण चरण है – जब एक बच्चा वयस्कता की ओर बढ़ता है। इस समय शरीर, मन और भावनाओं में बहुत से बदलाव आते हैं। इसलिए इस उम्र में ’’स्वस्थ रहना और जागरूक रहना’’ अत्यंत आवश्यक है। इस अवसर पर आभार ज्ञापन सिप्स, सागर (मप्र) के प्राचार्य युवराज सिंह द्वारा दिया दिया। इस आवसर पर श्रीमती शैलबाला बैरागी, श्रीमती विद्योत्तमा महोबिया, कु आरिफा खान, कु रूपाली, सुश्री लता सोनी, सुश्री नविता , सुश्री अनामिका जैन एवं छात्र-छात्राओं की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को सफल बनाया। वन्दे मातरम् राष्ट्रीय गीत के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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