Thursday, January 1, 2026

स्मार्ट मीटर के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन : 200 यूनिट मुफ्त बिजली समेत 11 मांगें रखेगा संगठन

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स्मार्ट मीटर के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन : 200 यूनिट मुफ्त बिजली समेत 11 मांगें रखेगा संगठन

भोपाल। सोमवार को बिजली उपभोक्ताओं का एक विशाल आंदोलन देखने को मिलेगा। मध्यप्रदेश बिजली उपभोक्ता एसोसिएशन (MECA) के नेतृत्व में दोपहर 12:30 बजे शाहजहानी पार्क में राज्यभर से हजारों लोग जुटेंगे। इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य स्मार्ट मीटर के विरोध और उपभोक्ताओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना है। संगठन की ओर से 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने और बिजली दरों में कटौती सहित 11 प्रमुख मांगें रखी जाएंगी।

स्मार्ट मीटर के खिलाफ उपभोक्ताओं का बढ़ता आक्रोश

एसोसिएशन की प्रदेश संयोजक रचना अग्रवाल और लोकेश शर्मा ने बताया कि न सिर्फ मध्यप्रदेश बल्कि देशभर में उपभोक्ता स्मार्ट प्रीपेड मीटरों के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह विरोध किसी राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा नहीं है, बल्कि आम जनता के जीवन और रोज़मर्रा की आय से जुड़ा गंभीर सवाल है।

संगठन के सदस्य मुदित भटनागर ने बताया कि भोपाल के कई इलाकों में स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जिनसे गरीब और मध्यम वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है। उनके अनुसार, इन मीटरों के कारण उपभोक्ताओं को अत्यधिक बिजली बिल चुकाने पड़ रहे हैं और कई लोग आर्थिक तंगी में आ गए हैं।

कई जिलों में उपभोक्ताओं को भारी बिलों से परेशानी

संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद से पूरे प्रदेश में बिलों की समस्या गंभीर हो गई है। भोपाल में ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं, जहां लोगों ने समय पर भुगतान करने के बावजूद 10,000 से लेकर 29,000 रुपये तक के बिल प्राप्त किए हैं।

ग्वालियर, विदिशा, सीहोर, गुना, सतना, इंदौर, देवास, दमोह और जबलपुर सहित लगभग सभी जिलों में उपभोक्ता असामान्य रूप से बढ़े हुए बिलों की शिकायत कर रहे हैं। ग्वालियर में एक उपभोक्ता के एक कमरे के घर का बिल 5,000 रुपये तक पहुंच गया, जबकि कुछ उपभोक्ताओं को एक ही महीने में दो-दो बार बिल जारी किए गए हैं।

गुना जिले में एक किसान को तो 2 लाख रुपये से अधिक का बिल थमा दिया गया। कई लोग मजबूरी में अपने गहने, बर्तन या अन्य सामान बेचकर बिल भरने को विवश हैं।

उपभोक्ताओं की मुख्य आपत्तियाँ: स्मार्ट मीटर कैसे बढ़ा रहे हैं मुसीबतें

स्मार्ट मीटर मोबाइल रीचार्ज की तरह प्रीपेड सिस्टम पर काम करते हैं। इसका मतलब यह है कि उपभोक्ताओं को पहले पैसे जमा करने होंगे, तभी बिजली का उपयोग किया जा सकेगा। संगठन के अनुसार, यह प्रणाली गरीब परिवारों पर भारी बोझ डाल रही है, क्योंकि आय अस्थिर होने पर उनकी बिजली तत्काल काट दी जाती है।

इसके अलावा, इन मीटरों की मॉनिटरिंग पूरी तरह केंद्रीकृत सिस्टम से होती है, जिससे उपभोक्ताओं को पारदर्शिता की कमी महसूस होती है। संगठन का कहना है कि कंपनी चाहें तो यूनिट्स को एडजस्ट कर सकती है, जिससे बिलों की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।

स्मार्ट मीटर टाइम ऑफ डे (TOD) के अनुसार अलग-अलग दरों पर बिजली का हिसाब लगाते हैं — दिन में महंगी और रात में सस्ती बिजली दरें। यह व्यवस्था भी आम उपभोक्ताओं के लिए समझ से परे और जटिल बन गई है।

मीटर खराब होने की स्थिति में उपभोक्ताओं को नया मीटर लेने के लिए फिर से पूरा भुगतान करना पड़ता है। वहीं, बिल नहीं भर पाने पर बिजली तुरंत काट दी जाती है और पुनः कनेक्शन के लिए 350 रुपये वसूले जाते हैं, जबकि उपभोक्ताओं की सिक्योरिटी डिपॉजिट पहले से विभाग के पास मौजूद है।

एक और बड़ी समस्या यह है कि अब बिजली बिल की हार्ड कॉपी नहीं दी जा रही। ग्रामीण और अशिक्षित उपभोक्ताओं के लिए यह डिजिटल प्रक्रिया मुश्किल साबित हो रही है, क्योंकि सभी के पास स्मार्टफोन या इंटरनेट की सुविधा नहीं है।

सरकार से संगठन की प्रमुख मांगें

प्रदर्शन के दौरान संगठन निम्नलिखित 11 प्रमुख मांगें सरकार के सामने रखेगा:

– बिजली क्षेत्र के निजीकरण की नीति को रद्द किया जाए।

– बिजली संशोधन विधेयक 2022 को पूरी तरह वापस लिया जाए।

– स्मार्ट मीटर लगाने की नीति समाप्त की जाए।

– उपभोक्ताओं को हार्ड कॉपी में पोस्टपेड बिल दिए जाएं।

– पहले से लगाए गए स्मार्ट मीटर हटाकर पुराने डिजिटल मीटर दोबारा लगाए जाएं।

– विरोध में शामिल उपभोक्ताओं पर दर्ज एफआईआर और केस निरस्त किए जाएं।

– अनुचित रूप से बढ़े बिलों को रद्द किया जाए।

– भविष्य में उपभोक्ताओं को उचित और पारदर्शी बिल ही जारी किए जाएं।

– बिजली दरों में कटौती कर गरीब उपभोक्ताओं को राहत दी जाए।

– जिन उपभोक्ताओं से भुगतान नहीं हो पाया है, उन्हें कम से कम तीन महीने का समय दिया जाए और उनका कनेक्शन ना काटा जाए।

– सभी उपभोक्ताओं को 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली दी जाए, क्योंकि बिजली ढांचा जनता के टैक्स से तैयार हुआ है।

भोपाल बनेगा विरोध का केंद्र

स्मार्ट मीटर को लेकर बढ़ते असंतोष के बीच सोमवार का यह प्रदर्शन प्रदेशव्यापी आंदोलन की दिशा तय कर सकता है। एसोसिएशन का दावा है कि यदि सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं, तो यह विरोध आगे और भी बड़े स्तर पर किया जाएगा।

उपभोक्ताओं की बढ़ती नाराज़गी इस बात की ओर इशारा करती है कि स्मार्ट मीटर व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार को जल्द ही ठोस निर्णय लेना पड़ सकता है, ताकि आम जनता को राहत मिल सके और बिजली व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे।

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